किसी बदलाव की उम्मीद ना करें: उत्तर कोरिया

किम जोंग उन (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट AFP PHOTO KCNA VIA KNS
Image caption किम जोंग उन के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है. इसलिए पड़ोस देश काफ़ी चिंतित हैं.

उत्तर कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय जगत से साफ़ कह दिया है कि वे उत्तर कोरिया के पूर्व नेता किम जोंग इल की मौत और उसके बाद उनके बेटे किम जोंग उन के सर्वोच्च नेता चुने जाने के बाद उत्तर कोरिया की नीतियों में किसी तरह के बदलाव की उम्मीद ना करें.

उत्तर कोरिया के शक्तिशाली राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के हवाले से सरकारी मीडिया ने ये बयान जारी किया है.

बयान में कहा गया है, ''हमलोग पूरे यक़ीन के साथ ये घोषणा करतें हैं कि दक्षिण कोरिया की कटपुतली सरकार समेत दुनिया भर के 'बेवक़ूफ़' नेताओं को हमारी नीतियों में किसी तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं करना चाहिए.''

उत्तर कोरिया के पूर्व नेता किम जोंग इल की 17 दिसंबर को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी.

किम जोंग इल 1994 से उत्तर कोरिया पर शासन कर रहे थे और उनके कार्यकाल के दौरान उत्तर कोरिया ने दो परमाणु परीक्षण किए थे.

अब उनके बेटे किम जोंग उन को पार्टी, देश और सेना का सर्वोच्च नेता चुना गया है.

पड़ोसी देश

उत्तर कोरिया के पड़ोसी देश इस बात पर नज़रें टिकाए हुए हैं कि उत्तर कोरिया में नेतृत्व परिवर्तन होने के बाद दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों में कोई फ़र्क़ आएगा या नहीं.

परमाणु कार्यक्रम और ख़राब मानवाधिकार रिकॉर्ड के कारण उत्तर कोरिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी अलग-थलग है और अपने पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया से तो वो एक तरह से युद्ध की स्थिति में है.

उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को सुलझाने के लिए गठित किए गए छह देशों के गुट की बैठक को महीनों तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.

राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग उत्तर कोरिया की सर्वोच्च संस्था है और उसने अपने बयान में ये भी कहा है कि उत्तर कोरिया कभी भी दक्षिण कोरियाई नेता ली म्यूंग बक से समझौता नहीं करेगा.

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से इस बात के लिए भी नाराज़गी जताई है कि उसने दिवंगत नेता किम जोंग इल को श्रंद्धांजलि देने के लिए दक्षिण कोरिया से केवल दो ग़ैर-सरकारी प्रतिनिधि मंडल को जाने दिया था.

इस बीच किम जोंग इल की मौत के बाद से उस क्षेत्र में उभरे हालात का जायज़ा लेने के लिए अमरीका ने उस इलाक़े में अपने एक वरिष्ठ राजनयिक को भेजने का फ़ैसला किया है.

अमरीकी विदेश विभाग के अनुसार पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए उपमंत्री कर्ट कैंप्बेल तीन जनवरी से सात जनवरी के बीच चीन, दक्षिण कोरिया और जापान का दौरा करेंगे.

फ़िलहाल अमरीका इस क्षेत्र में देखों और इंतज़ार करो की नीति अपना रहा है लेकिन कुछ जानकारों की राय है कि उत्तर कोरिया की तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ाने का अमरीका के लिए ये सबसे बेहतरीन मौक़ा है.

अमरीका और दक्षिण कोरिया के रक्षा प्रमुखों ने भी कोरियाई प्रायद्वीप के बारे में गुरूवार को लगभग 20 मिनटों तक फ़ोन पर बातचीत की थी.

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