ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों पर ओबामा की मुहर

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Image caption बराक ओबामा, राष्ट्रपति, अमरीका

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उस महत्वपूर्ण रक्षा विधेयक को अपनी स्वीकृति दे दी है जिसके क़ानून बनने पर ईरान के ख़िलाफ़ कड़े प्रतिबंधों का प्रावधान है.

इस क़ानून के तहत अमरीकी वित्तीय विभाग के उस भाग में कटौती की जाएगी जो ईरान के केंद्रीय बैंक के साथ व्यापारिक संबंध रखती हैं.

लेकिन ओबामा ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि उन्हें विधेयक के उस हिस्से को लेकर चिंता थी, जिसके तहत संदिग्ध विदेशी चरमपंथियों से निपटना था.

विधेयक में एक धारा ये भी है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली सत्तर करोड़ डॉलर की सहायता उसे तभी दी जाएगी जबकि वो इस बात की घोषणा करेगा कि उसके यहां जो भी विस्फोटक बन रहे हैं उसके बारे में जानकारी सार्वजनिक करे.

दरअसल, पिछले साल अगस्त महीने में सीनेट ने पाकिस्तान को दी जाने वाली इस सहायता को रोकने की मांग की थी, लेकिन अमरीकी विदेश मंत्रालय ने इस शर्त के साथ सहायता जारी रखने का फ़ैसला किया था.

राष्ट्रपति बराक ओबामा इस वक़्त हवाई में हैं और वहीं पर उन्होंने इस विधेयक पर हस्ताक्षर किया. ये कदम उस वक़्त उठाया गया है जबकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव काफ़ी बढ़ गया है.

पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान परमाणु हथियारों की क्षमता प्राप्त करने की भरपूर कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ़ ऊर्जा और चिकित्सा के उद्देश्य से है.

पिछले दिनों अमरीका ने ईरान के वित्तीय क्षेत्र के ख़िलाफ़ कुछ प्रतिबंध लगाए थे.

कांग्रेस से मतभेद

राष्ट्रपति ओबामा इस तरह के प्रतिबंध को लेकर शुरू से ही सावधान थे क्योंकि उन्हें डर है कि इस तरह का कोई भी क़दम ऐसे समय में तेल बाज़ार से संबंध ख़राब कर सकता है जबकि आर्थिक क्षेत्र में अनिश्चितता छाई हुई है.

विधेयक अमरीकी कांग्रेस के दोनों सदनों में विशाल बहुमत के साथ पारित हुआ था और इसमें तेल बाज़ार को शामिल करने के लिए राष्ट्रपति को छह महीने का समय दिया गया था.

संदिग्ध चरमपंथ के मामले पर ह्वाइट हाउस और कांग्रेस के बीच महीनों चली खींचतान के बाद राष्ट्रपति ओबामा ने विधेयक पर हस्ताक्षर किया है.

बराक ओबामा विधेयक के उस प्रावधान का विरोध कर रहे थे जिसमें इस तरह के मामलों को सिविलियन कोर्ट में ले जाने से सरकार को रोका जा सकता था.

इस प्रावधान को ख़त्म करने के बाद ही वो विधेयक पर हस्ताक्षर करने पर सहमत हुए.

नए क़ानून के तहत अमरीका अथवा उसके सहयोगियों पर हमले की योजना में शामिल संदिग्धों को सिर्फ़ सैन्य अभिरक्षण की ज़रूरत होगी.

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