इतिहास के पन्नों में चार जनवरी

  • 4 जनवरी 2012

आज ही के दिन वर्ष 1958 में सर एडमंड हिलरी दक्षिणी ध्रुव पहुँचे थे. वर्ष 1951 में जब सिओल को लेकर उत्तरी और दक्षिणी कोरिया के बीच संघर्ष चल रहा था, ऐसा लगा कि कम्युनिस्ट कोरिया की फ़ौजें सिओल के नज़दीक पहुँच गई हैं.

1958: एडमंड हिलेरी दक्षिणी ध्रुव पहुँचे

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Image caption एवरेस्ट के अभियान के बाद सर एडमंड (बायें, साथ में जॉन हंट औऱ टेंज़िंग नॉर्के) ने कई दूसरे अभियानों में हिस्सा लिया. इनमें 1958 की दक्षिणी ध्रुव की यात्रा शामिल है

चार जनवरी 1958 का दिन था जब सर एडमंड हिलेरी दक्षिणी ध्रुव पहुँचे थे. 1912 में कैप्टेन रॉबर्ट एफ़ स्कॉट के अभियान के बाद ऐसा करने वाले वो पहले अन्वेषक थे. न्यूज़ीलैंड के रहने वाले हिलेरी और उनकी टीम ने 113 किलोमीटर की यात्रा ख़राब मौसम में तय की थी.

20 जनवरी 1958 को सर एडमंड ने दक्षिणी ध्रुव पर साथी अन्वेषक सर विवियन का स्वागत किया.

सर एडमंड और उनकी टीम हाल ही में बने स्कॉट कैंप से निकली, जबकि सर विवियन ने अपनी यात्रा की शुरुआत वेडेल समुद्र के पास स्थित शैकलटन कैंप से शुरू की थी.

दोनो अन्वेषकों ने अपनी यात्रा के लिए गाड़ियों का इस्तेमाल किया.

वर्ष 1953 में सर एडमंड हिलेरी और शेरपा टेंज़िंग नॉर्गे एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने वाले पहले व्यक्ति बने थे.

इस अभियान दल का नेतृत्व जॉन हंट ने किया था.

अभियान से लौटने के बाद हिलेरी और हंट को ब्रिटेन में नाइट की पदवी से सुशोभित किया गया.

एवरेस्ट के अभियान के बाद सर एडमंड ने कई दूसरे अभियानों में हिस्सा लिया. इनमें 1958 की दक्षिणी ध्रुव की यात्रा शामिल है.

सर हिलेरी ने 1961 में शेरपा लोगों के लिए एक चिकित्सीय और शैक्षणिक ट्रस्ट की स्थापना की. वर्ष 1984 से 1989 तक सर हिलेरी भारत में न्यूज़ीलैंड के उच्चायुक्त रहे.

1951: कम्युनिस्ट सेनाएँ सिओल के नज़दीक पहुँची

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Image caption उत्तरी और दक्षिणी कोरिया के बीच एक सीमा रेखा खींची गई है जो दोनो ही तरफ़ दो किलोमीटर तक फैली हुई है.

चीन और उत्तरी कोरियाई सेनाएँ के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद ये दूसरा मौक़ा था कि जब दोनो देशों की सेनाएँ सिओल के नज़दीक पहुँची.

सिओल में अधिकारियों ने लोगों को शहर ख़ाली करने को कहा. हज़ारों लोग शहर के दक्षिण की ओर हान नदी के पार जाने लगे.

कई कोशिशों के बाद संयुक्त राष्ट्र की सेनाएँ मार्च 1951 में सिओल का नियंत्रण वापस लेने में कामयाब रहीं.

इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने युद्धविराम का आह्वान किया.

आख़िरकार जुलाई 1951 में बातचीत शुरू हुई, लेकिन केओसंग में बातचीत टूट गई.

लड़ाई में गतिरोध आ गया था.

जुलाई 1953 में बातचीत दोबारा शुरू हुई.

आख़िरकार 27 जुलाई 1953 में लड़ाई ख़त्म हुई. इस लड़ाई में 20 लाख लोग मारे गए.

अगस्त में दोनो पक्षों ने क़ैद सैनिकों को रिहा किया.

उत्तरी और दक्षिणी कोरिया के बीच एक सीमा रेखा खींची गई है जो दोनो ही तरफ़ दो किलोमीटर तक फैली हुई है.

आज तक दोनो पक्षों के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं.

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