लीबिया- सुरक्षा है समस्या

  • 8 जनवरी 2012
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Image caption ज़िंतान के मिलिशिया ने ही गद्दाफ़ी के बेटे इस्लाम को पकड़ा था

लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी के तख्तापलट के पाँच महीने बीत जाने के बावजूद अभी भी नई सरकार वहाँ सुरक्षा को लेकर समस्या का सामना कर रही है.

त्रिपोली में मौजूद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट एक भीड़भाड़ वाली छोटी गंदी जगह बन गया है जिसे दुरुस्त करने की ज़रुरत है. लेकिन यही एयरपोर्ट लीबियाई लोगों के जीवन का एक अहम हिस्सा भी है क्योंकि इसे व्यापार के लिए दोबारा खोल दिया गया है.

इस एयरपोर्ट के टर्मिनल और रनवे पर जो सैनिक गश्त लगाते हैं, यही उनका अड्डा भी है.

दरअसल, ये सैनिक ज़िंतान शहर के वो पूर्व विद्रोही है जिन्होंने कुछ महीने पहले ही एयरपोर्ट पर कब्ज़ा किया था.

कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी को सत्ता से हटे हुए समय बीत चुका है लेकिन ज़िंतान शहर के लोग अभी भी यहाँ जमे हुए है. यही मिलिशिया या सैन्य समूह मुख्य इलाक़ो पर नियंत्रण रखे हुए हैं लेकिन इनमें भी अब टूट होने का दबाव बढ़ रहा है.

'आंदोलन के संरक्षक'

देश भर से आने वाले ये मिलिशिया ख़ुद को आंदोलन के संरक्षक की तरह मानते है. यहां वैसे तो शहर काफ़ी छोटे हैं लेकिन ज़िंतान में लगभग 50, 000 लोग रहते हैं और ऐसे में इन लोगों ने महत्वपूर्ण जीत हासिल की तो उन्होंने नई लीबिया की सरकार में अन्य मिलिशिया के मुक़ाबले एक महत्वपूर्ण मुक़ाम हासिल कर लिया है.

ज़िंतान के सैनिको ने ही गद्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल-इस्लाम को पिछले साल नवंबर के महीने में पकड़ा था. इसके साथ-साथ त्रिपोली एयरपोर्ट पर नियंत्रण के बाद इन मिलिशिया को एक शत्तिशाली सेना बना दिया है.

लेकिन लीबिया जो गृह युद्ध के बाद एक स्थाई लोकतंत्र में तब्दील हो रहा है, वहाँ सरकार अलग-अलग सैन्य समूहों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है और इसके बदले उन्हें राष्ट्रीय सेना और पुलिस में लाने का प्रयास कर रही है.

हालांकि सैन्य प्रमुख यूसुफ़ अल मंगूश को बना दिया गया है लेकिन सेना को स्थापित किया जाना अभी बाकी है.

त्रिपोली में मौजूद ज़िंतान शहर के कमांडर मुख़्तर अल-अख़्दर का कहना है कि उनके सैनिक नई सेना के बनने के बाद उसमें शामिल हो जाएंगे लेकिन तब तक उन्हें अपनी जगह पर रहने का अधिकार है.

उनका कहना है, ''एयरपोर्ट की सुरक्षा करना हमारी ज़िम्मेदारी है. हमारा आंदोलन अभी भी ख़तरे में है. अगर हम छोड़ देंगे तो दिक़्कत आ जाएगी.''

लेकिन समूहों में हो रही छिट-पुट झड़पों के कारण शिकायत भरी आवाज़े उठने लगी है.

त्रिपोली में प्रदर्शनकारी हटने के लिए ये मांग कर रहे हैं कि वहाँ कहीं और से सैन्य समूह लाए जाएं.

समय

कुछ दिन पहले मिसराता और त्रिपोली के मिलिशिया में हुई झड़प में चार लोगों की मौत हो गई थी.

लीबिया में राष्ट्रीय अंतरिम परिषद के अध्यक्ष मुस्तफ़ा अब्दल-जलील ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर सैन्य समूह को काबू में नहीं लाया गया तो संभावित गृह युद्ध की स्थिति बन जाएगी.

त्रिपोली के पश्चिम में स्थित शहर ज़ावियाह यथास्थिति को बदलने के लिए अग्रणी भूमिका निभा रहा है. वहाँ पर पूर्व विद्रोही समूह ने अब एक नई स्थानीय मिलिशिया इकाई का गठन कर लिया है और वे राष्ट्रीय सेना में शामिल होने के लिए तैयार हैं.

सेना के एक पुराने अड्डे में हुए एक समारोह के दौरान इन लोगों को सैन्य अधिकारी बनाया गया. इस दौरान इन लोगों ने विद्रोह के समय उठाई गई बंदूकों का समर्पण किया.

ये उन लाखों की संख्या में मौजूद पूर्व विद्रोही समूहों में से एक समूह है जो सरकारी सेना में शामिल हो गया है लेकिन सरकार का ऐसे ही तमाम मिलिशिया को हथियार डालने और नई सेना में शामिल करने का प्रयास है.

लेकिन लीबिया के पूर्वी हिस्से में दो सैन्य समूह पहले ही कह चुके है कि उन्हें मंगूश को सैन्य प्रमुख का पद देना पसंद नहीं है क्योंकि वे साल 1999 तक कर्नल गद्दाफ़ी के साथ थे.

रक्षा मंत्री ओसामा जुवाली का कहना है कि दिक़्कत इस बात की है कि ज़्यादार पूर्व विद्रोही उन लोगों के साथ काम करना पसंद नहीं कर रहे है जिन्होंने कर्नल गद्दाफ़ी की मदद की थी.

लीबिया को आज़ादी की घोषणा के तीन महीने बाद वहां शांति है और काफ़ी हद तक स्थिरता है, जैसा कि बहुत लोगों ने आशंका जताई थी. लेकिन मिलिशिया की मौजूदगी को भी गंभीरता से लिया जा रहा है जिसके लगातार बढ़ने को स्थिरता के लिए ख़तरा माना जा रहा है.

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