तेल पर हड़ताल से थम गया नाइजीरिया

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Image caption नाइजीरिया में आम आदमी को सरकार की नीयत पर भरोसा नहीं है.

नाइजीरिया में तेल की क़ीमतों में भारी बढ़ोतरी के विरोध में सोमवार से बेमियादी आम हड़ताल शुरू हो गई है. तेल की क़ीमतों में इज़ाफ़े की वजह है उसपर दी जानेवाली सब्सिडी को ख़त्म किया जाना जिसकी घोषणा सरकार ने हाल में ही की है.

हड़ताल के पहले दिन दुकानें, दफ्तर, स्कूल और यहां तक के पेट्रोल पंप पूरी तरह से बंद रहे.

देश के सबसे बड़े शहर लागोस में हज़ारों लोग ने जमा होकर गुडलक जोनाथन हुकुमत के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किए जिनके सरकार के फ़ैसले के बाद पश्चिमी अफ़्रीकी देश में तेल की क़ीमते लगभग दुगनी हो गई हैं.

सुबह आयोजित एक विशाल रैली में एक बैनर पर लिखा था, ''एक दिन ग़रीबों के पास खाने के लिए कुछ नहीं होगा सिवाए अमीरों के."

ख़बर है कि लागोस में एक व्यक्ति की मौत हो गई है.

तेल की बढ़ी क़ीमतों ने यातायात को भी मंहगा कर दिया है.

घायल

उत्तरी शहर कानो में पुलिस को भीड़ को क़ाबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने और हवाई फ़ायरिंग करनी पड़ी. इस हंगामे में 20 लोग घायल हो गए हैं.

हमेशा गहमागहमी वाले शहर लागोस में सन्नाटा पसरा है सिवाए पुलिस कारों के सायरनों और प्रदर्शन स्थल को जा रहे प्रदर्शनकारियों के नारों के आवाज़ों के.

बीबीसी संवाददाता मार्क लोबेल का कहना है कि लोग ग़नी पार्क में जमा हैं और लोगों के आने का सिलसिला जारी है.

अबुजा में हवाई अड्डा जाने वाले रास्ते पर पुलिस ने नाकेबंदी कर दी है.

पुलिस को युवाओं की एक भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े.

इधर राष्ट्रपति जोनाथन गुडलक ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था के मद्देनज़र तेल पर सब्सिडी का जारी रखा जाना मुश्किल है.

तर्क

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Image caption लागोस में सोमवार को एक विशाल जन रैली का आयोजन किया गया

सरकार का तर्क है कि आठ अरब डॉलर की मामूली सब्सिडी से ग़रीबों को कोई ख़ास मदद नहीं मिल पा रही है.

लेकिन इस फैसले ने नाइजीरिया के आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं जहां ज़्यादातर लोग रोज़ाना दो डॉलर से कम आमदनी पर गुज़ारा करते हैं और कई लोगों का मानना है कि देश की तेल सम्पदा का उन्हें एकमात्र फ़ायदा सस्ते ईंधन के रूप में मिलता है.

नाइजीरिया में रिफ़ाइंड पेट्रोलियम का ज़्यादातर हिस्सा आयात किया जाता है क्योंकि देश के ज़्यादातर तेलशोधक संयंत्र पूर्ण क्षमता से कम काम करते हैं.

ईंधन को इसके बाद सब्सिडी के साथ बेचा जाता है और इसे आयात करने वाले गुट मोटा मुनाफ़ा भी कमाते हैं.

नीयत पर सवाल

सरकार का कहना है कि अरबों डॉलर की यही रक़म ग़रीबों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर ख़र्च की जाएगी जो एक सुधार की दिशा में एक अहम क़दम होगा.

लेकिन नाइजीरिया के ज़्यादातर आम लोगों का मानना है कि ये रक़म भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी और उन्हें इससे शायद ही कोई लाभ मिल पाएगा.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड इस सिलसिले में बीते साल के अंत में नाइजीरिया गई थीं.

लोगों का कहना है कि वर्तमान वित्त मंत्री पहले विश्व बैंक में काम करते थे.

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