नामांकन दाख़िले पर बर्फ़बारी की गाज

उत्तराखंड में बर्फबारी
Image caption मुख्यमंत्री खंडूरी को क़रीब नौ किलोमीटर पैदल चलना पड़ा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और कोटद्वार से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी भुवन चंद्र खंडूरी सोमवार सुबह नामांकन के लिये गाजे-बाजे के साथ पौड़ी ज़िला मुख्यालय जाने के लिए निकले थे, लेकिन उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि मौसम का मिजाज़ इस क़दर बिगड़ेगा कि वो 'शुभ घड़ी' में नामांकन दाख़िल नहीं कर पाएंगे.

भुवन चंद्र खंडूरी का काफ़िला रास्ते में फंस गया और नामांकन दाख़िल करने के लिए उन्हें एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाना पड़ा.

पौड़ी कोटद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर पौड़ी से नौ किलोमीटर पहले घोड़ीखाल में भारी बर्फबारी हो रही थी जिससे रास्ता बंद हो गया और खंडूरी बीच में ही फंस गए.

आख़िरकार उन्हें नौ किलोमीटर का पहाड़ी सफ़र पैदल पूरा करना पड़ा लेकिन फिर भी नामांकन 'मनचाहे मुहुर्त' में दाख़िल नहीं किया जा सका.

77 वर्ष के चुके खंडूरी ने कहा, ''ये मौसम की कठिनाइयां हैं और मैं पहाड़ के कठिन जीवन से परिचित हूं۔''

ये अलग बात है कि अपने राजनैतिक जीवन में खंडूरी शायद ही कभी इतना पैदल चले होंगे.

बात टली

पुरोला सीट से बीजेपी के उम्मीदवार मालचंद्र का नामांकन तो तमाम कोशिशों के बावजूद भी दाख़िल नहीं हो पाया और बात मंगलवार तक के लिए टल गई.

रास्ते में फंस गए मालचंद्र ने कहा, ''मौसम ख़राब है और रास्ते बंद हैं. मैं अगले दिन नामांकन दाख़िल करने की कोशिश करूंगा.''

खंडूरी और मालचंद्र अकेले नहीं हैं जिन्हें बर्फबारी की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

उत्तराखंड के कई इलाकों में तीन दिनों से जारी बर्फबारी, बारिश और भीषण ठंड ने पहाड़ी इलाकों में विधायक बनने के इच्छुक कई दावेदारों के पसीने छुड़ा दिए हैं और उम्मीदवारों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

नक्षत्रों का चक्कर

दरअसल ज्योतिषियों ने नौ तारीख़ को नामांकन भरने के लिए शुभ बताया था, इसलिए उत्तराखंड में सोमवार को उम्मीदवारों में नामांकन भरने की होड़ लगी रही, लेकिन बादल और बर्फ ने पहाड़ी इलाके के प्रत्याशियों के मंसूबे पर पानी फ़ेर दिया.

पिथौरागढ़ ज़िले में बीजेपी अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल जब नामांकन दाख़िल करने जा रहे थे तो एक बड़ा हादसा हो गया.

डिडीहाट और कनालीछीना के बीच उनके समर्थकों से भरी गाड़ी भूस्खलन की चपेट में आ गई. हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं.

ग्रह-नक्षत्रों पर उम्मीदवारों को इस क़दर भरोसा था कि राज्य में नामांकन के नाम पर अब तक सन्नाटा छाया था.

अधिकांश नेताओं ने पंडितों की ओर से सुझाए समय के अनुसार नामांकन के लिये नौ तारीख़ की दोपहर का वक्त तय किया था.

स्थानीय समाचारपत्रों के मुताबिक़ बहुजन समाज पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को इसके लिये बाक़ायदा निर्देश भी जारी किए थे.

निर्वाचन आयोग ने जब उत्तराखंड में 30 जनवरी को चुनाव कराने की घोषणा की थी, तब राज्य सरकार ने आयोग से आग्रह किया था कि चुनाव की तारीख़ें फरवरी के आख़िर में रखी जाएं क्योंकि इस समय मौसम ख़राब रहने की आशंका रहती है और चुनाव में दिक्कतें आएंगी.

लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई क़ुरैशी ने चुनाव की तारीख़ों पर पुनर्विचार करने से ये कहकर साफ़ मना कर दिया कि मौसम का 40 सालों का रिकॉर्ड देखकर चुनाव की तारीख़ें तय की गई हैं.

उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों के लिये इस महीने की 30 तारीख़ को मतदान होना है और इसके लिये 12 तारीख़ तक नामांकन किया जा सकता है.

जगह-जगह रास्ते बंद

इधर राज्य सरकार ने आईटीबीपी को अलर्ट कर दिया है और राज्य में दो दिनों के लिये स्कूलों को बंद कर दिया गया है.

मौसम विभाग के निदेशक आनन्द शर्मा के अनुसार, राज्य में अभी कुछ समय बारिश और बर्फबारी के हालात बने रहेंगे.

प्रदेश में ख़राब मौसम के कारण उत्तरकाशी में यमुनोत्री हाईवे बंद है. मोरी-पुरोला और चौरंगीखाल मार्ग बंद होने से करीब 200 गांव अलग-थलग पड़ गए हैं.

चकराता-त्यूणी मार्ग भी बंद है और जोशीमठ और औली में भी बर्फबारी से जगह-जगह रास्ते बंद हैं.

कुमांऊ मंडल में भी पिथौरागढ़, मुक्तेश्वर और नैनीताल से भारी बर्फबारी के समाचार हैं. राज्य के कई इलाकों में खाने-पीने की चीजों की क़िल्लत हो गई है और रूद्रप्रयाग जैसे कुछ इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं ठप हो गई हैं.

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