इतिहास के पन्नों में 12 जनवरी

इतिहास के पन्नों पर नज़र डालें तो 12 जनवरी के दिन दुनिया में कई महत्त्वपूर्ण घटनाएं घटीं थी.

1991: अमरीकी संसद ने इराक़ युद्घ को मंज़ूरी दी

Image caption बीबीसी के पत्रकार मार्टिन बेल ब्रितानी सैनिकों से बात करते हुए.

12 जनवरी 1991 को अमरीकी संसद ने इराक़ के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई करने की मंज़ूरी दे दी थी. इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने तत्कालीन इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को 15 जनवरी तक कुवैत से अपनी सेना हटाने को कहा था और ऐसा ना करने पर इराक़ को सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी थी.

तीन दिनों की लंबी और गर्मागर्म बहस के बाद अमरीकी संसद ने इस प्रस्ताव को 183 वोटों के मुक़ाबले 250 वोटों से पास कर दिया.

लेकिन डेमोक्रेट पार्टी के बहुमत वाले ऊपरी सदन में ये प्रस्ताव काफ़ी कम अंतर से पास हुआ. 52 सासंदों ने इसके पक्ष में वोट दिया जबकि 47 सांसदों ने इराक़ के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई को ग़लत ठहराते हुए उसके विरोध में मतदान किया था.

आख़िरी समय में संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव ज़ैवियर पेरेज़ डी कुइयार ने युद्ध को टालने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली और 16 जनवरी 1991 को राजधानी बग़दाद पर भारी बमबारी के साथ ऑपरेशन डेज़र्ट स्टॉर्म के नाम से पहले खाड़ी युद्ध की शुरुआत हो गई.

25 फ़रवरी को इराक़ी सेना कुवैत से पीछे हटने लगी और 28 फ़रवरी को अमरीका ने युद्ध में विजयी होने की घोषणा कर दी. कुवैत तो आज़ाद हो गया लेकिन सद्दाम हुसैन सत्ता में बने रहे थे.

1976: जासूसी उपन्यासकार अगाथा क्रिस्टी का निधन

Image caption अगाथा क्रिस्टी बीसवी सदी के बड़े उपन्यासकारों में से एक थी.

12 जनवरी 1976 को दुनिया की शायद सबसे जानी मानी जासूसी उपन्यासकार अगाथा क्रिस्टी का निधन हुआ था. वो पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहीं थीं और 85 वर्ष की आयु में ऑक्सफ़ोर्डशर स्थित अपने घर में ही उनकी मौत हुई थी.

ब्रिटेन की इस उपन्यासकार ने अपने जीवन में कुल 83 किताबें लिखी थीं और उनकी लगभग 30 करोड़ कॉपियां बिक चुकी थीं.

उपन्यास के अलावा क्रिस्टी ने लघु कहानियां, ड्रामा और कविताएं भी लिखीं थी.

एक लेखिका की हैसियत से पहली बार उनकी पहचान बनी उनके उपन्यास 'द मिस्टीरियस अफ़ेयर ऐट स्टाइल्स' से जो उन्होंने 1920 में लिखी थी.

उनकी आमदनी के बारे में लोगों की राय अलग-अलग है लेकिन ऐसा माना जाता है कि 1950 के दशक में उनकी सालाना आमदनी लगभग एक लाख पाउंड थी.

एक बेहतरीन उपन्यासकार होने के साथ-साथ वो एक सफल व्यवसायी भी थीं और अपने पैसे को ठीक तरह से निवेश करती थी.

उनकी मौत के बाद उनका आख़िरी उपन्यास 'स्लीपिंग मर्डर' और उनकी आत्मकथा छपी थी.

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