इतिहास के पन्नों में 14 जनवरी

इतिहास के पन्ने पलटें तो 14 जनवरी का दिन कई वजहों से याद किया जाएगा. इसी दिन वर्ष 2002 में ब्रितानी सरकार ने घोषणा की कि क़रीब 11 महीने तक देश में फैली फ़ुट एंड माउथ बीमारी को मध्यरात्रि में ख़त्म माना जाएगा. इसी दिन वर्ष 1994 को 300 वर्ष में ब्रिटेन के शाही परिवार के किसी सदस्य ने पहली बार कैथोलिक धर्म अपनाया.

2002: ब्रिटेन में फ़ुट एंड माउथ बीमारी ख़त्म

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Image caption फ़ुट एन्ड माउथ बीमारी का संक्रमण जानवरों के बीच बहुत तेज़ी से होता है.

14 जनवरी 2002 के दिन ब्रितानी सरकार ने घोषणा की कि क़रीब 11 महीने तक देश में फैली फ़ुट एंड माउथ बीमारी को मध्यरात्रि में ख़त्म माना जाएगा.

पर्यावरण, खाद्य और ग्रामीण मामलों के मंत्रालय के मुताबिक गुज़रे तीन महीनों में इस बीमारी का कोई नया मामला सामने नहीं आया.

साथ ही बीमारी की शुरुआत जिस इलाके से हुई थी वहां कि भेड़ों पर की गई ताज़ा जांच से बीमारी के कोई लक्षण नहीं पाए गए.

फरवरी 2001 में इस बीमारी के पहले मामले सामने आने के बाद 65 लाख से ज़्यादा भेड़ों को मारा गया ताकि बीमारी और ना फैले.

ये इतना मुश्किल था कि इसके लिए सेना की मदद ली गई, ताकि जानवरों को सामूहिक तरीके से जलाकर दफ़्न किया जा सके.

इस बीमारी की वजह से युनाइटिड किंगडम के निर्यात पर बुरा असर पड़ा और एक अनुमान के मुताबिक क़रीब ढाई अरब पाउंड का नुकसान हुआ.

1994: डचेस ऑफ़ केन्ट कैथोलिक चर्च की सदस्य बनीं

Image caption 300 वर्ष में ब्रिटेन के शाही परिवार के किसी सदस्य ने पहली बार कैथोलिक धर्म अपनाया

14 जनवरी 1994 को 300 वर्ष में पहली बार ब्रिटेन के शाही परिवार के किसी सदस्य ने कैथोलिक धर्म अपनाया.

एक प्राइवेट सर्विस में डचेस ऑफ़ केन्ट कैथोलिक चर्च की सदस्य बनीं.

ब्रितानी संसद में सन 1701 में पारित एक क़ानून के तहत राज-गद्दी के वारिस रोमन कैथोलिक धर्म नहीं अपना सकते ना ही इस धर्म के अनुयायी से शादी कर सकते हैं.

डचेस ऑफ़ केन्ट के पति ब्रिटेन की महारानी के दूर के भाई थे और राजगद्दी के वारिसों के क्रम में 18वें थे.

ड्यूक के दफ़्तर की ओर से जारी बयान के मुताबिक डचेस के फ़ैसले का इसपर कोई असर नहीं होगा क्योंकि शादी के समय वो ऐंग्लिकन थीं.

वहीं डचस की ओर से कहा गया कि ये उनका निजी फ़ैसला है और इसका चर्च के बारे में चल रही बहस से कोई लेना-देना नहीं.

ग़ौरतलब है कि वर्ष 1992 में इंग्लैंड की चर्च के महिलाओं को पादरी बनाए जाने के फ़ैसले के बाद कई नामी गिरामी हस्तियों ने कैथोलिक धर्म अपनाया था.

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