ट्यूनीशिया में सफल जनक्रांति की पहली वर्षगांठ

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Image caption ट्यूनिशिया के बाद कई देशों में लोग शासन के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर आए

उत्तरी अफ़्रीका और मध्य पूर्व के कई देशों में राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव की चिंगारी फूंकने वाले ट्यूनीशिया में सफल जनक्रांति की पहली वर्षगाँठ मनाई जा रही है.

एक वर्ष पूर्व 14 जनवरी को ही तत्कालीन राष्ट्रपति ज़िने अल-आबिदीन बेन अली ने सत्ता छोड़ दी थी और भागकर सऊदी अरब में पनाह लेनी पड़ी थी.

फल विक्रेता मोहम्मद बुअज़ीज़ी ने आत्मदाह करके सरकारी तंत्र के ख़िलाफ़ जिस आंदोलन को जन्म दिया था, वह देखते ही देखते क्रांति में तब्दील हो गया था और इसी क्रांति ने देश में बीते साल अक्तूबर में शांतिपूर्ण चुनावों का मार्ग प्रशस्त किया था.

अरब जगत में परिवर्तनों का एक साल

ट्यूनीशिया की क्रांति ने सुधार आंदोलनों को ऐसी हवा दी कि लंबे समय से सत्ता पर क़ाबिज़ तानाशाह शासक होस्नी मुबारक मिस्र में और मुअम्मर गद्दाफ़ी लीबिया में जड़ से उखड़ गए.

लोकतंत्र की स्थापना और राजनीतिक सुधारों की मांग को लेकर होने वाले आंदोलनों की इस बयार को अरब क्रांति और अरबी वसंत जैसे नाम दिए गए.

विद्रोह शुरु करने वाले की मूर्ति

ट्यूनीशिया के लोगों को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने अपने संदेश में कहा है कि लोकतंत्र, आज़ादी और सम्मान के लिए ट्यूनीशिया के लोगों की प्रतिबद्धता ने सारी दुनिया को प्रेरणा दी है.

कई कार्यक्रम

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Image caption मोहम्मद बुअज़ीज़ी ने सरकारी तंत्र के ख़िलाफ़ विरोध जताते हुए ख़ुद को आग लगा ली थी जिसके बाद आंदोलन भड़क उठा था

ट्यूनीशिया में इस मौक़े पर सप्ताहांत में कई कार्यक्रमों का आयोजन होगा जिसमें पड़ोसी देशों के साथ-साथ अन्य अरब देशों के प्रतिनिधि भी शिरकत करने वाले हैं.

ट्यूनीशिया के लोकतांत्रिक तरीक़े से निर्वाचित नेताओं के अलावा शिरकत करने वाले कुछ बड़े नामों में अल्जीरिया के राष्ट्रपति अब्देल अज़ीज़ और क़तर के अमीर शेख़ हमद बिन ख़लीफ़ा अल-थानी भी शामिल हैं.

विदेश मंत्री साद-इद्दीन अल ओठमनी मोरक्को का प्रतिनिधित्व करेंगे जहां शाह मोहम्मद ने ट्यूनीशिया से उठती शुरूआती लपटों की आंच से ही घबराकर अपने देश में सुधारों का रास्ता अख़्तियार कर लिया था.

ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति मोनसेफ मारज़ूकी इस मौक़े पर एक हज़ार से ज़्यादा क़ैदियों की सज़ा माफ़ करेंगे.

बेन अली के प्रत्यर्पण की मांग

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Image caption ट्यूनिशिया बेन अली का प्रत्यर्पण चाहता है

लीबिया में नई राष्ट्रीय अंतरिम परिषद के प्रमुख मुस्तफ़ा अब्देल जलील भी पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं. हालांकि उनकी यात्रा के बारे में विस्तार से अभी कुछ नहीं बताया गया है.

इससे पहले बीते साल 17 दिसम्बर को ट्यूनीशिया में हज़ारों लोगों ने अरब क्रांति शुरु करने वाले बुअज़ीज़ी की याद में कार्यक्रमों का आयोजन किया था जिन्होंने सरकारी तंत्र के ख़िलाफ़ विरोध जताने के लिए ख़ुद को आग लगा ली थी.

ट्यूनीशिया में पूर्व राष्ट्रपति ज़िने अल-आबिदीन बेन अली को देश की अदालतों ने आर्थिक और अन्य अपराधों का दोषी ठहराया है.

बेन अली ट्यूनीशिया से भागकर फ़्रांस पहुंचे थे, लेकिन वहां उनके विमान को उतरने की इजाज़त नहीं दी गई थी जिसके बाद उन्होंने सऊदी अरब में शरण ली थी.

ट्यूनीशिया के अधिकारियों का कहना है कि बेन अली के प्रत्यर्पण के लिए सऊदी अरब से दो बार निवेदन किया गया जिसे उसने अनसुना कर दिया.

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