इतिहास के पन्नों में 17 जनवरी

इतिहास में 17 जनवरी की तारीख़ कई घटनाओं के लिए महत्वपूर्ण है. इसी दिन खाड़ी युद्ध की शुरुआत हुई थी, जापान के कोबे शहर में भीषण भूकंप आया था और अमरीका के लॉस एंजेलेस में भी भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी.

1991: खाड़ी युद्ध शुरू हुआ

Image caption कुवैत को इराक़ के कब्ज़े से आज़ाद कराने के लिए पश्चिमी देशों ने इराक़ पर हमला किया था.

साल 1991 में 17 जनवरी को ही खाड़ी युद्ध की शुरुआत हुई थी जब अमरीकी, ब्रिटिश, फ़्रेंच, सऊदी और कुवैत की संयुक्त सेना ने इराक़ पर हमला बोल दिया था.

इतिहास में इस सैन्य अभियान को ऑपरेशन डेज़र्ट स्टॉर्म के नाम से जाना जाता है.

इराक़ पर सैन्य कार्रवाई के तहत रणनीतिक ठिकानों, तेल शोधन कारखानों और बग़दाद हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया था.

हवाई हमले के दो घंटे बाद अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने टेलिविज़न पर दिए संदेश में कहा था कि इराक़ को कुवैत पर कब्ज़ा छोड़ देना चाहिए और वहां वैध सरकार की पुनर्स्थापना की जानी चाहिए.

लेकिन इराक़ के शासत सद्दाम हुसैन का कहना था कि लड़ाई शुरु हो गई है और इराक़ी लोगों को दुश्मनों का डट कर मुक़ाबला करना चाहिए.

दरअसल अगस्त 1990 में इराक़ ने कुवैत पर हमला कर दिया था जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने लगातार उससे कुवैत का कब्ज़ा छोड़ने की अपील की थी.

लेकिन सद्दाम हुसैन के अड़ियल रुख की वजह से संयुक्त राष्ट्र ने इराक़ पर कई प्रतिबंध भी लगा दिए थे.

इन सबके बावजूद सद्दाम हुसैन ने कुवैत के इराक़ में विलय की घोषणा कर दी थी.

इसी की परिणति खाड़ी युद्ध के रूप में हुई थी जिसके तहत पश्चिमी शक्तियों ने कुवैत को इराक़ के प्रभाव से मुक्त कराने के लिए सैन्य अभियान चलाया था.

1995: कोबे में विनाशकारी भूकंप

Image caption जापान के कोबे शहर में 47 साल बाद इतना भीषण भूकंप आया था.

17 जनवरी को ही जापान के कोबे शहर में आए विनाशकारी भूकंप में कम से कम 200 लोग मारे गए थे और 13,000 लोग बुरी तरह ज़ख़्मी हो गए थे.

कोबे के साथ साथ ओसाका और प्राचीन नगर क्योटो में भी भूकंप से भारी तबाही हुई थी.

रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 7.2 मापी गई थी और पिछले 47 सालों में जापान में आया ये सबसे भीषण भूकंप था.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि भूकंप के झटके 20 सेकेंड तक महसूस किए गए थे और उसके बाद भी थोड़े-थोड़े अंतराल पर मामूली झटके आते रहे थे.

इस तबाही में सैकड़ों लोग मलबे में तब्दील हुई इमारतों में दब गए थे, ट्रेनें पटरी से उतर गई थीं और कई इलाक़ों में लंबे समय के लिए बिजली की आपूर्ति ठप हो गई थी.

जापान के प्रधानमंत्री तोमीची मुरायामा ने इस आपदा से निपटने के लिए आपातकालीन कमेटी का गठन किया था जिसे प्रभावित लोगों के राहत और बचाव के काम की निगरानी करनी थी.

1994: लॉस एंजेलेस में भूकंप से तबाही

Image caption लॉस एंजेलिस में आए भूकंप के बाद मेयर ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी.

जापान में आए भूकंप से ठीक एक साल पहले अमरीका के लॉस एंजेलेस शहर में भी विनाशकारी भूकंप आया था जिसमें 20 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 6.6 मापी गई थी जो लगातार 40 सैकेंड तक बनी रही थी.

इस त्रासदी में एक हज़ार से ज़्यादा लोग ज़ख़्मी हो गए थे.

लॉस एंजेलिस के महापौर रिचर्ड रायोर्डन ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी और एक दिन के लिए शहर में कर्फ्यू लगा दिया था.

बिजली संकट की वजह से हवाई अड्डे को बंद कर दिया गया था और डॉक्टरों ने खुले में ज़ख़्मी हुए लोगों का ऑपरेशन किया था क्योंकि अस्पतालों की इमारत ढह गई थी.

भूकंप के बाद अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और घरों में रहने की सलाह दी थी.

संबंधित समाचार