ज़िंदा बचे भारतीयों को घर लौटने का इंतज़ार

  • 16 जनवरी 2012
इटली का जहाज़ इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption दुर्घटनाग्रस्त कोस्टा कॉनकोर्डिया जहाज़ शुक्रवार रात तट के पास पत्थरों से टकरा गया था

इटली के समुद्र तट के पास दुर्घटनाग्रस्त जहाज़ से बचकर एक होटल में रह रहे चालक दल के भारतीय सदस्यों ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि उन्हें जल्द से जल्द वापस भारत आने का इंतज़ार है.

उधर इटली में भारत के राजदूत देबब्रत साहा ने बीबीसी को बताया कि वो भारतीय नाविकों से बात कर रहे हैं.

इस दुर्घटना में शामिल 202 भारतीय नाविकों में से एक टेरेंस रेबेलो लापता हैं.

बचे हुए नाविकों को ग्रोसेटो नाम की जगह में एक होटल में रखा गया है जहाँ देबब्रत साहा भी नाविकों के साथ मौजूद हैं.

भारतीय दूतावास के एक अधिकारी विश्वास नेगी ने बताया कि जहाज़ पर सवार एक यात्री शंभू त्रिपाठी ने इटली छोड़ दिया है, लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि वो भारत में हैं या फिर कहीं और.

नेगी के मुताबिक़ उन्हें इटली की कंपनी की ओर से विश्वास दिलाया गया है कि वो भारतीय नाविकों को वापस भेजने का ख़र्च उठाएँगे.

दुर्घटनाग्रस्त कोस्टा कॉनकोर्डिया जहाज़ में 4,000 से अधिक लोग सवार थे और शुक्रवार की रात यह तट के पास पत्थरों से टकरा गया था.

इटली की राजधानी रोम में भारतीय दूतावास में अधिकारी सुनील अग्रवाल के अनुसार भारतीय नागरिकों को यात्रा दस्तावेज़ मुहैया कराए जाएंगे.

बचने की ख़ुशी

उधर इटली से फ़ोन पर बात करते हुए नाविकों ने कहा कि उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि वो बच गए हैं.

नाविक संतोष ने कहा कि उन्हें अपने काग़ज़ात वापस मिलने का इंतज़ार है.

मुंबई के रहने वाले वीजू नायर ने बताया कि घटना रात पौन दस के आसपास हुई और वो आधे घंटे तक पानी में रहे.

वीजू जहाज़ पर बटलर थे.

वीजू ने कहा, “रेडक्रॉस और इटली के अधिकारियों ने हमारी काफ़ी मदद की. उन्होंने हमें खाना, कपड़े, जूते दिए. उन्होंने हमें एक होटल में पहुँचाया. हमारे कागज़ात, पॉसपोर्ट, कपड़े सभी बह गए.”

वीजू का कहना है कि नाविक अपना पासपोर्ट वापस चाहते हैं.

उन्होंने कहा, “हमने भारतीय दूतावास अधिकारियों से कहा है कि आप हमें पासपोर्ट दें. उनका कहना है कि वो ऐसा नहीं कर सकते. उनका कहना है कि वो हमें भारत वापस जाने के लिए इमरजेंसी सर्टिफ़िकेट देंगे. और अगर हमें पासपोर्ट मिलता हैं तो वो मात्र छह महीने के लिए लागू रहेगा. ये बेकार है क्योंकि भारत जाकर हमें नए पासपोर्ट बनवाने होंगे.”

मुंबई के ही रहने वाले इथर डिसूज़ा का कहना था कि उन्हें अपने सामान के चले जाने का कोई ग़म नहीं है.

वो जहाज़ पर स्टोर्स में अकाउंटेंट का काम करते थे. डिसूज़ा ने कहा, “सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि मैं जीवित हूँ.”

एक दूसरे के साथ

उन्होंने कहा कि अगर उनका दल चाहता तो अपना सामान लेकर जान बचाने की कोशिश कर सकता था, लेकिन किसी भी बात की परवाह किए बिना चालककर्मियों ने यात्रियों की मदद की.

वीजू बताते हैं कि दुर्घटना से पहले लोगों को किसी तकनीकी ख़राबी के बारे में बताया गया था.

लेकिन जब ये स्पष्ट हो गया कि स्थिति ख़राब है तो लोगों से लाइफ़बोट में बैठने को कहा गया.

वीजू बताते हैं, “सब कुछ आधे घंटे में ही हो गया. पानी अंदर आ गया. बहुत लोग फंस गए थे. जहाज़ के कई लोगों को बचाया गया. लोगों को बचाते हुए मैं पानी में आधा घंटा रहा. मैं कैसे बचा ये पता नहीं. भगवान का शुक्र है कि मैं ज़िंदा हूँ.”

नाविकों का कहना था कि उन्हें बोला गया कि उन्हें रोम भेजा जा रहा है.

वीजू ने बताया कि उन्हें नुकसान को लेकर इटली की कंपनी और नाविकों के बीच बैठक में कोई फ़ैसला होने की उम्मीद है.

वीजू ने कहा, “हमारी गुज़ारिश है कि हमें अपनी तन्ख्वाह की राशि वापस दे दीजिए. हमें कंपनी के धन की ज़रूरत नहीं है. हमारा सारा सामान पानी में चला गया गया है. जिस कपड़े में हम ड्यूटी कर रहे थे, वही कपड़े हमने पहन रखे हैं. जो कुछ हमारे पास हैं, वो रेड क्रॉस ने दिया है.”

चालककर्मियों से बातचीत के दौरान पीछे से हंसने की आवाज़ें भी आ रही थीं. डिसूज़ा ने बताया कि उन्हें अपने दोस्तों के साथ रहने की ख़ुशी है और हर कोई एक दूसरे का साथ दे रहा है. उन्होंने कहा कि सभी को इंतज़ार है कि वो कब अपने घर पहुँचे.

संबंधित समाचार