इतिहास के पन्नों में 19 जनवरी

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाएंगें कि आज ही के दिन कांग्रेस ने इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए अपने नेता के रूप में चुना था, और दक्षिण अफ़्रीका में बाग़ी खिलाड़ियों ने अपना विरोध जताने के लिए अनूठा कदम उठाया था.

1966: भारत के प्रधानमंत्री पद के लिए इंदिरा गांधी का चयन

Image caption इंदिरा गांधी को भारत का अब तक का सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री माना जाता है.

1966 में आज ही के दिन कांग्रेस पार्टी ने भारत के प्रधानमंत्री पद के लिए इंदिरा गांधी को अपना नेता चुना था. इंदिरा गांधी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की इकलौती बेटी थीं.

कांग्रेस संसदीय दल की नेता चुने जाने के बाद इंदिरा गांधी ने पार्टी और देश की सेवा करते रहने का विश्वास दिलाया.

उन्होंने कहा कि वो शांति का वातावरण क़ायम करने की पूरी कोशिश करेंगी जो कि उनके पिता और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू हमेशा कहा करते थे.

लेकिन इंदिरा गांधी का चयन सत्ता के लिए एक भीषण संघर्ष के बाद हुआ. इंदिरा गांधी को चुनौती दे रहे थे पूर्व वित्त मंत्री मोरारजी देसाई.

इस दौड़ में मोरारजी देसाई के अलावा कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलज़ारीलाल नंदा भी थे लेकिन उन्होंने इंदिरा गांधी के पक्ष में अपना नाम वापस ले लिया था.

तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की अचानक मौत हो जाने के बाद गुलज़ारीलाल नंदा कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप मे काम कर रहे थे.

कांग्रेस के कई बड़े नेता मोरारजी देसाई को भी मनाने की कोशिश कर रहे थे कि वो नेतृत्व की रेस से अलग हो जाएं और इंदिरा गांधी को सर्वसम्मति से नेता चुना जाए लेकिन वो नेता के लिए चुनाव कराने की अपनी मांग पर अड़े रहे.

आख़िरकार नेता पद के लिए चुनाव हुआ और कांग्रेस के कुल 526 सांसदों में से इंदिरा गांधी को 355 वोट मिले जबकि मोरारजी देसाई को कुल 169 सासंदों का समर्थन मिला.

चुनाव के बाद मोरारजी देसाई ने इंदिरा गांधी के साथ पूरा सहयोग करने का यक़ीन दिलाया.

लेकिन कांग्रेस पार्टी के भीतर वो इंदिरा गांधी के सबसे बड़े विरोधी रहे और पार्टी के भीतर दक्षिण पंथी गुट का नेतृत्व करते थे.

लेकिन इंदिरा गांधी ने अपने नेतृ़त्व में 1967 और 1971 के आम चुनावों में पार्टी को भारी बहुमत से कामयाबी दिलाई.

1975 में अलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी पाते हुए उनके चुनाव को अवैध क़रार दिया.

इसके जवाब में इंदिरा गांधी ने इस्तीफ़ा देने से इनकार कर दिया और देश में इमरजेंसी लगा दी.

उसके बाद 1977 में इमरजेंसी हटा ली गई और देश में आम चुनाव हुए लेकिन इसमें इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी की करारी हार हुई और जनता दल के मुखिया के रूप में मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने.

इंदिरा गांधी की 1980 के चुनाव में दोबारा वापसी हुई और वो एक दफ़ा फिर प्रधानमंत्री बनीं लेकि 31 अक्तूबर 1984 को उनके अंगरक्षकों ने ही उनकी गोलीमारकर हत्या कर दी.

1990: दक्षिण अफ़्रीक़ा में बाग़ी क्रिकेटरों का विरोध

Image caption माइक गैंटिंग ने इंग्लैंड के लिए कई शानदार पारियां खेली हैं.

दक्षिण अफ़्रीक़ा के साथ क्रिकेट खेलने पर लगे प्रतिबंध की अनदेखी करते हुए इंग्लैंड से 15 क्रिकेटरों का एक दल आज ही के दिन 1990 में दक्षिण अफ़्रीक़ा के साथ क्रिकेट खेलने के लिए जोहानेसबर्ग पहुंचा था.

लेकिन हवाई अड्डे पर सैंकड़ों लोगों ने उनके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था.

पुलिस को प्रदर्शनकारियों को क़ाबू में करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा था और यहां तक कि पुलिस ने उन पर कुत्ते भी छोड़ दिए थे.

ब्रितानी क्रिकेटरों का नेतृत्व ब्रिटेन के पूर्व कप्तान माइक गैंटिंग कर रहे थे.

हवाई अड्डे पर हुए प्रदर्शन के बारे में जब पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछे तो उनका जवाब था, "जब क्रिकेटरों का जहाज़ पहुंचा तो उस समय तक सब कुछ ख़त्म हो चुका था और हमने किसी तरह की हिंसा नहीं देखी थी."

गैंटिग ने आगे कहा, ''हमे उम्मीद है कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा होगा और अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बलपूर्वक ख़त्म करा दिया गया है तो हमे इसका दुख है''.

पच्चीस दिनों तक लगातार प्रदर्शन और नेल्सन मंडेला की रिहाई के बाद देश में बदले राजनीतिक हालात के मद्देनज़र आयोजकों ने इस दौरे को समय से पहले ही समाप्त करने का फ़ैसला कर लिया.

इस दौरे पर जाने के लिए गैंटिंग पर तीन साल की पाबंदी लगा दी गई और फिर 1992-93 के भारत और श्रीलंका दौरे के लिए उन्हें इंग्लैंड की टीम में शामिल किया गया.

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