इतिहास के पन्नों में बीस जनवरी

बीस जनवरी के दिन वर्ष 1961 में जॉन एफ़ केनेडी अमरीका के राष्ट्रपति बने थे. इसी दिन वर्ष 2002 में क्यूबा स्थित अमरीकी सैनिक अड्डे ग्वांतानामो बे की जेल में बंद कैंदियों की तस्वीरें पहली बार सार्वजनिक हुई थीं और उनको लेकर काफ़ी विवाद हुआ था.

1961: जॉन एफ़ केनेडी अमरीका के राष्ट्रपति बने

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Image caption केनेडी अमरीका के चहेते राष्ट्रपतियों में से एक रहे हैं

बीस जनवरी के दिन 1961 में जॉन एफ़ केनेडी अमरीका के राष्ट्रपति बने थे. वे अमरीका के तब तक से सबसे कम उम्र के निर्वाचित राष्ट्रपति थे.

राजधानी वाशिंगटन में स्थित कैपिटल हिल में 43 वर्षीय केनेडी ने अमरीका के 35वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लिया और ख़ास बात ये थी कि सबसे कम उम्र के इस राष्ट्रपति ने अमरीका के इतिहास मे तब तक के सबसे बुज़ुर्ग राष्ट्रपति 70 साल के आइसेनहावर से सत्ता संभाली थी.

इस मौक़े पर उन्होंने विश्व में शांति क़ायम करने के लिए तत्कालीन सोवियत संघ के साथ मिलकर काम करने की भी घोषणा की.

लगभग दस मिनट के अपने भाषण को उन्होंने इस शब्दों के साथ ख़त्म किया, ''ये मत पूछें कि देश ने आपके लिए क्या किया है, बल्कि ये पूछें कि आप देश के लिए क्या कर सकते हैं''.

उनके ये शब्द यादगार बन गए है और आज तक कई देशों में इसे लोग दोहराते हैं.

उनके कार्यकाल के दौरान 1962 में अमरीका और सोवियत संघ लगभग युद्ध के कगार पर आ गए थे जिसे इतिहास में क्यबा मिसाइल संकट कहा जाता है.

लेकिन केनेडी ने पहली बार परमाणु परीक्षण को बंद करने के लिए अगस्त 1963 में सोवियत संघ से एक संधी करने की पहल की. उनके इस क़दम को दोनों देश के बीच चल रहे शीत युद्ध को समाप्त करने की दिशा में पहला क़दम माना जाता है.

लेकिन 22 नवंबर 1963 में राष्ट्रपति केनेडी की गोलीमार कर हत्या कर दी गई थी. उनकी हत्या उस समय हुई थी जब वो टेक्सास में एक राजनीतिक समारोह में हिस्सा लेने के लिए सड़क के रास्ते कार से जा रहे थे.

2002: ग्वांतानामो बे के कैदियों की तस्वीरों पर बवाल

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Image caption ग्वांतानामो बे की जेलों में बंद क़ैदियों की दास्तां बाद में सार्वजनिक हुई

बीस जनवरी के ही दिन साल 2002 में क्यूबा स्थित अमरीकी सैनिक अड्डे ग्वांतानामो बे की जेल में बंद कैंदियों की तस्वीरें पहली बार सार्वजनिक हुई थीं और उनको लेकर काफ़ी विवाद हुआ था.

उस समय उस जेल में कुल 144 क़ैदी रह रहे थे.

मानवाधिकार के लिए काम करने वाली संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा था कि ग्वांतानामो बे की जेलों में क़ैदियों को जो सुविधाएं दी जा रहीं हैं वे अमरीकी पैमाने से काफ़ी कम है और वहां लोगों के साथ ग़ैर-इंसानी बर्ताव हो रहा है.

ब्रिटेन की एक मानवाधिकार संस्था ने भी इसका विरोध किया था.

लेकिन अमरीका का कहना था कि सार्वजनिक हुई तस्वीरें सिर्फ़ ये दिखा रही हैं कि कैसे क़ैदियों को उन जेलों तक लाया गया था और आम दिनों में उन क़ैदियों के साथ बुरा व्यवहार नहीं होता है.

रेड क्रॉस ने मांग की थी कि उन क़ैदियों के साथ जेनेवा कनवेनश्न के अनुसार बर्ताव किया जाए लेकिन अमरीका ने इससे साफ़ इनकार करते हुए कहा था कि वे क़ैदी युद्धबंदी नहीं हैं बल्कि वे ग़ैर-क़ानूनी तौर पर लड़ाई कर रहे थे इसलिए उन्हें कोई भी का़नूनी मदद नहीं दी जाएगी.

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