समलैंगिकों के ख़िलाफ़ घृणा फैलाने के दोषी

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Image caption ब्रिटेन में समलैंगिकता को लैंगिक रुझान का मामला भर माना जाता है

ब्रिटेन में अपनी तरह के पहले मामले में अदालत ने तीन मुसलमान व्यक्तियों को समलैंगिकों के ख़िलाफ़ घृणा की भावना फैलाने का दोषी पाया है.

इन लोगों ने ऐसे पर्चे बाँटे थे जिसमें कहा गया था कि समाज को समलैंगिक स्त्री और पुरुषों से मुक्ति दिलाने के लिए उन्हें फाँसी की सज़ा दे दी जानी चाहिए.

इन तीनों को नए ब्रितानी क़ानून के तहत दोषी पाया गया है जिसमें किसी के लैंगिक रुझान के आधार पर घृणा फैलाना जुर्म है.

डर्बी की अदालत में चले मुक़दमे में दो लोगों को रिहा कर दिया गया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगले महीने दोषी पाए गए तीन लोगों को सज़ा सुनाई जाएगी.

पहला मामला

ये मामला 18 महीने पुराना है.

तब 28 वर्षीय कबीर अहमद, 27 वर्षीय रिज़वान जावेद और 42 वर्षीय इहजाज़ अली ने डर्बी के जामिया मस्जिद के सामने समलैंगिकों के ख़िलाफ़ पर्चे बाँटे थे.

इन लोगों ने मस्जिद के आसपास के इलाक़े में लोगों के लेटर बॉक्स में भी ये पर्चे डाल दिए थे.

समलैंगिकों को मौत की सज़ा की मांग करने वाले इस पर्चे में एक पुतले की तस्वीर भी दिखाई गई थी, जिसके गले में फँदा दिखाया गया था.

डर्बी की अदालत ने इन तीनों को दोषी पाया है.

लैंगिक रुझान के आधार पर घृणा फैलाने के आरोप में पहली बार इन तीनों को दोषी पाया गया है.

इस इलाक़े के पुलिस अधिकारी का कहना है कि इस पर्चे से कई लोग भयभीत हो गए थे.

न्यायाधीश ने तीनों को दोषी ठहराने के साथ ही ज़मानत भी दे दी लेकिन ये साफ़ कर दिया कि अगले महीने जब सज़ा सुनाई जाएगी तो उन्हें अपनी करतूतों के लिए जेल जाना होगा.

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