सुरक्षा कारणों से एच5एन1 शोध पर रोक

  • 21 जनवरी 2012
इमेज कॉपीरइट AP
Image caption दुनियाभर में बर्ल्ड फ़्लू के महामारी बनने के ख़तरे का भय है

प्रयोगशाला में घातक एच5एन1 बर्ल्ड फ़्लू वायरस का हूबहू नमूना तैयार करने वाले अनुसंधानकर्ताओं ने औपचारिक घोषणा करते हुए कहा है कि सुरक्षा कारणों और दुरुपयोग के खतरों को देखते हुए वो अगले दो महीनों के लिए अपने शोध कार्य को बंद कर रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता जॉन मैक्मेनस के मुताबिक नीदरलैंड के एरासमस विश्वविद्दालय और अमरीका के विसकॉनसिन-मैडिसन विश्वविद्दालय के वैज्ञानिकों के दल एच5एन1 बर्ल्ड फ़्लू को आसानी से संक्रमित करने वाले वायरस को प्रयोगशाला में बनाकर उसके प्रभावों और तोड़ का जांच कर रहे थे.

हालांकि इस प्रयोग में सफलता के बाद अमरीका और संयुक्त राष्ट्र सहित दुनियाभर में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गईं. इस शोध के लिए आर्थिक मदद दे रहे अमरीका ने ये जैविक संरचना आतंकवादियों के हाथ पड़ने के ख़तरे देखते हुए वैज्ञानिकों से इस मामले में अति-गोपनीयता बरतने को कहा.

जैविक हथियारों संबंधी चिंताएं

हालांकि अब वैज्ञानिकों ने सार्वजनिक रुप से लिखे गए एक पत्र में कहा कि वो अपने शोध कार्य को अगले दो महीनों के लिए बंद कर रहे हैं.

महत्वपूर्ण और संवेदनशील शोध कार्यों के गलत हाथों में पड़ने और जैविक हथियार के रुप में आंतकवादियों द्वारा प्रयोग किए जाने की आशंकाएं नई नहीं हैं.

साल 1972 में जैविक हथियारों के विकास और उन्हें सुरक्षित रखने पर विश्वव्यापी प्रतिबंध लगा गिया गया था.

हालांकि कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस संरचना के बारे में सरकारों को जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वो शुरुआती क्रम में ही एच5एन1 फ़्लू की रोकथाम कर सकें.

संबंधित समाचार