इतिहास के पन्नों में 22 जनवरी

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इतिहास के पन्ने पलटें तो 22 जनवरी का दिन कई वजहों से याद किया जाएगा. 22 जनवरी 1999 की देर रात ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके बेटों को उड़ीसा के क्योंझर ज़िले में ज़िंदा जला दिया गया था. सोवियत संघ के अहम् सरकार-विरोधी आलोचकों में से एक, परमाणु वैज्ञानिक डॉक्टर आन्द्रेई सखारोव को नज़रबंद कर दिया गया.

1999: ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दोनों बेटों की हत्या

22 जनवरी 1999 की देर रात, ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके बेटों को उड़ीसा के क्योंझर ज़िले में ज़िंदा जला दिया गया था.

उस रात स्टेंस अपने घर के रास्ते में एक कार के अंदर अपने दोनों बेटों (10 वर्षीय फ़िलिप और छे वर्षीय टिमथी) के साथ सो रहे थे जब मनोहरपुर गांव में एक भीड़ ने उनकी गाड़ी पर पेट्रोल छिड़ककर उसमें आग लगा दी.

स्टेंस ने कार से निकलकर भागने की भी कोशिश की लेकिन भीड़ ने कथित रूप से उन्हें निकलने नहीं दिया.

स्टेंस वहां 30 वर्षों से कुष्ठ रोगियों के साथ काम कर रहे थे लेकिन उनपर उस इलाके में धर्मांतरण करवाने का आरोप भी लगा था.

इन हत्याओं के लिए उड़ीसा हाई कोर्ट ने दारा सिंह को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी. दारा सिंह के संबंध दक्षिणपंथी बजरंग दल से भी बताए जाते हैं.

वहीं केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई ने इस मामले में मौत की सज़ा की मांग की थी.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी आजीवन कारावास की सज़ा बरक़रार रखी थी.

1980: सोवियत संघ ने सरकार-विरोधी परमाणु वैज्ञानिक को नज़रबंद किया

सोवियत संघ के अहम् सरकार-विरोधी आलोचकों में से एक, परमाणु वैज्ञानिक डॉक्टर आन्द्रेई सखारोव को, 22 जनवरी 1980 के दिन नज़रबंद किया गया.

वर्ष 1975 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित सखारोव ने एक अमरीकी टेलिविज़न चैनल को दिए साक्षात्कार में अफ़गानिस्तान से सोवियत सेनाएं वापस बुलाने की मांग की थी.

उन्होंने सोवियत संघ के इस हमले के बाद अमरीकी राष्ट्रपति कार्टर के प्रतिबंध लगाने के फ़ैसले का और मॉस्को में उस वर्ष होने वाले ओलंपिक ख़ेलों के बहिष्कार का समर्थन भी किया था.

सखारोव और उनकी पत्नी को सोवियत संघ की ख़ुफ़िया सर्विस केजीबी ने मॉस्को से क़रीब 250 मील दूर गोर्की शहर में सात वर्षों तक नज़रबंद रखा.

वर्ष 1986 में तत्कालीन राष्ट्रपति मिख़ैल गोर्बाचोव ने उन्हें आज़ाद करने का फ़ैसला किया जिसके बाद वो लोकतंत्र के अभियान का प्रमुख चेहरा बने.

वर्ष 1989 में उनकी सोवियत संघ का नया संविधान लिखने में भी भूमिका रही. हालांकि उसी वर्ष दिसंबर महीने में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई.

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