यमन के राष्ट्रपति सालेह ने देश छोड़ा

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Image caption सालेह ने देश छोड़ने से पहले विदाई भाषण में देश की जनता से माफ़ी मांगी

यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह ने इलाज के लिए देश छोड़ दिया है.

टीवी पर अपने विदाई भाषण में उन्होंने देश की जनता से माफ़ी मांगी और कहा कि यदि 33 साल के शासन के दौरान उनसे कोई भूल हुई तो उन्हें माफ़ कर दिया जाए.

यमन के अधिकारियों के कहना है कि अली अब्दुल्ला सालेह ओमान चले गए हैं.

अपने भाषण में सालेह ने कहा कि वो जल्द ही इलाज के लिए अमरीका जाएंगे और उसके बाद यमन वापस लौटेंगे.

सालेह की देश से विदाई से एक दिन पहले यमन की संसद ने एक क़ानून पारित कर सालेह को मुकदमा चलाए जाने की कार्रवाई से मुक्त कर दिया था.

मुकदमे से मुक्ति

ये विधेयक एक समझौते के तहत पारित किया गया जिसमें राष्ट्रपति को सत्ता छोड़ने के बाद देश छोड़ना था.

समझौते में राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह ने ये शर्त रखी थी कि उनके शासन काल के दौरान या सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की हत्या से जुड़े़ किसी मामले में उन पर या उनके परिवार पर अभियोग नहीं चलाया जाएगा.

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Image caption सना में प्रदर्शनकारी सालेह पर मुकदमा चलाए जाने की मांग करते रहे

राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के प्रवक्ता अहमद अल-सउफ़ी ने कहा कि राष्ट्रपति रविवार को पड़ोसी देश ओमान चले गए हैं और वहाँ से वो अपनी आगे की यात्रा जारी रखेंगे.

समाचार ऐजेंसी एपी के मुताबिक वाशिंगटन में वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अमरीका ने इलाज के लिए सालेह को अनुमति दे दी है.

यमन छोड़ने से पहले पार्टी के कार्यकर्ताओं से सालेह ने कहा कि ईश्वर की मर्ज़ी से वो अमरीका जा रहे हैं और जल्द ही पार्टी प्रमुख की हैसियत से वापस लौटेंगे.

जाने से पहले राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह ने उपराष्ट्रपति अबेद राबू मंसूर हादी की पदोन्नति की भी घोषणा की. उम्मीद है कि वो ही सालेह की जगह राष्ट्रपति का पद सम्हालेंगे.

69 साल के सालेह पिछले साल जून में राष्ट्रपति भवन पर किए गए हमले में बुरी तरह घायल हो गए थे और इसके बाद उन्होंने इलाज के लिए कई महीने साउदी अरब में बिताए थे.

प्रदर्शन

इस बीच , राजधानी सना में प्रदर्शनकारी सालेह पर मुकदमा चलाए जाने की मांग करते रहे .

प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सालेह ने जो अपराध किए हैं उन्हें उनका दंड मिले.

हालांकि सालेह को तो मुकदमों से पूरी छूट मिल गई है लेकिन राष्ट्रपति सालेह के वरिष्ठ अघिकारियों को क़ानूनी कार्रवाई से सीमित छूट ही मिली है और उन पर आतंकवाद और भ्रष्टाचार के मामले चलाए जा सकते है.

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