एक तिब्बती के मारे जाने की पुष्टि

  • 25 जनवरी 2012
इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption चीन के सिचुआन प्रांत में बड़ी संख्या में तिब्बती रहते हैं

चीन ने सिचुआन प्रांत में सुरक्षा बलों के साथ इस हफ़्ते हुई दूसरी हिंसक झड़प में गोली लगने की वजह से एक तिब्बती नागरिक के मारे जाने की पुष्टि की है.

सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक़, स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि भीड़ ने मंगलवार को सेडा काउंटी में एक पुलिस स्टेशन पर हमला किया था.

तिब्बती कार्यकर्ताओं के समूहों का कहना है कि धार्मिक दमन का विरोध कर रहे लोगों पर सुरक्षाबलों ने गोलियां चलाईं.

इससे पहले, पड़ोसी ड्रेगो काउंटी में सोमवार को कम से कम दो प्रदर्शनकारी मारे गए थे.

तिब्बत की सीमा से सटे चीन के सिचुआन प्रांत में बड़ी संख्या में तिब्बती रहते हैं.

इस इलाक़े में होने वाली हिंसक घटनाओं की पुष्टि करना मुश्किल होता है क्योंकि बीबीसी समेत तमाम विदेशी मीडिया को यहां जाने की इजाज़त नहीं है.

शिन्हुआ का कहना है कि सेडा में 'भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बातचीत के प्रयास विफल होने के बाद' पुलिस ने बल प्रयोग किया.

शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक़ इसमें 'एक दंगाई मारा गया'.

पुलिस का कहना है कि भीड़ ने 'गैसोलीन की बोतलों, चाकुओं और पत्थरों के साथ पुलिस स्टेशन पर हमला किया, साथ ही पुलिस पर गोलियां चलाईं.'

शिन्हुआ ने सिचुआन तिब्बत शोध संस्थान के विशेषज्ञों के हवाले से सिचुआन प्रांत में हुए दो 'हमलों' को 'पूर्व नियोजित और संगठित हिंसा' बताया है.

लेकिन तिब्बती कार्यकर्ताओं के समूह इससे इनकार करते हैं और कहते हैं कि सेडा में कम से कम दो लोग मारे गए हैं.

ब्रिटेन स्थित 'फ़्री-तिब्बत' समूह ने स्थानीय निवासियों के हवाले से कहा है कि सेडा में अभी कर्फ़्यू लगा हुआ है.

'फ़्री-तिब्बत' के निदेशक स्टीफ़न ब्रिडन ने 'आज़ादी के आह्वान' के साथ बुधवार को एक बयान में कहा कि चीन तिब्बतियों के ख़िलाफ़ जानलेवा बल प्रयोग कर रहा है.

दर्ज़नों घायल

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption चीन के सिचुआन प्रांत में विदेशी मीडिया को दाख़िल होने की अनुमति नहीं है

इससे पहले, सोमवार को ख़बर आई थी कि सिचुआन प्रांत में ही एक अन्य झड़प में कम से कम दो लोग मारे गए है.

चीन के सरकारी मी़डिया का कहना है कि चाकुओं के साथ लोगों ने एक मुख्य सड़क पर स्थित कुछ दुकानों और एक पुलिस स्टेशन में तोड़फोड़ की. ये भी कहा कि भीड़ ने ड्रेगो काउंटी में चार वाहनों को नष्ट कर दिया.

तिब्बती कार्यकर्ताओं का कहना है कि चीन के सुरक्षाबलों ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां चलाईं.

'फ़्री-तिब्बत' के मुताबिक़, दो लोग मारे गए हैं जबकि भारत स्थित निर्वासित तिब्बती संसद और अमरीका स्थित मानवाधिकार समूह इंटरनेशनल कैम्पेन फ़ॉर तिब्बत ने मृतकों की संख्या तीन बताई है.

लेकिन शिन्हुआ का कहना है कि एक ही व्यक्ति मारा गया है.

ड्रेगो स्थित मठ के एक बौद्ध भिक्षु ने मंगलवार को एसोसिएटेड प्रेस न्यूज़ एजेंसी को टेलीफ़ोन पर बताया कि 33 लोगों की मरहम-पट्टी की गई है.

सकारात्मक संवाद

अमरीकी विदेश विभाग ने इन ख़बरों पर गहरी चिंता जताई है और तिब्बतियों की समस्याओं का हल निकालने के लिए चीन की सरकार से दलाई लामा या उनके प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक संवाद करने के लिए कहा है.

लेकिन चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हांग लेई ने मंगलवार को कहा कि विदेशों में बसे विरोधी समूह सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.

तिब्बत की सीमा से लगे चीन के सिचुआन प्रांत में हाल के महीनों में विरोध प्रदर्शनों की कई घटनाएं हुई हैं.

चीन के शासन में धार्मिक और सांस्कृतिक दमन के विरोध में मार्च 2011 से अब तक कुल 16 तिब्बती ख़ुद को आग लगा चुके हैं. इनमें से कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है.

तिब्बत में चार वर्ष पहले हुए दंगों में 19 लोगों के मारे जाने के बाद चीन के अधिकारियों ने तिब्बती कार्यकर्ताओं का कड़ाई से दमन किया है.

ख़ुद को आग लगाने वालों को चीन की सरकार चरमपंथी बताती है. चीन का आरोप है कि इसके पीछे दलाई लामा का हाथ है.

संबंधित समाचार