मिस्र में जनआंदोलन की पहली वर्षगाँठ

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Image caption जनांदोलन का हिस्सा रहे लोग चाहते हैं कि सैन्य परिषद भी जल्दी ही सत्ता से हट जाए

मिस्र में होस्नी मुबारक़ सरकार के ख़िलाफ़ जनआंदोलन को एक साल पूरा होने के मौक़े पर क़ाहिरा में तहरीर चौक के पास हज़ारों की संख्या में लोग जमा हो रहे हैं.

एक साल पहले शुरु हुए इस जनआंदोलन ने मिस्र में पिछले 30 वर्षों से चल रहे होस्नी मुबारक के शासन को खत्म कर दिया था.

मंगलवार को मिस्र में शासन संभाल रहे सैनिक परिषद ने जनआंदोलन को एक साल पूरा होने पर देश में कई दशकों से लागू आपातकाल को आंशिक रूप से ख़त्म करने की घोषणा की है.

होस्नी मुबारक के सत्ता से हटने के बाद वहां हुए पहले लोकतांत्रिक चुनावों में इस्लामिक पार्टियों का दबदबा रहा है.

होस्नी मुबारक पर फ़िलहाल प्रदर्शनकारियों की हत्या के आरोप में मुकदमा चल रहा है.

सैन्य परिषद के ख़िलाफ़ नारे

मंगलवार की रात होते-होते इस जनआंदोलन के केंद्र बिंदु रहे काहिरा के तहरीर चौक पर हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए थे.

चौक पर लगाए गए तंबुओं में इकट्ठा हुए ये लोग होस्नी मुबारक के बाद सत्ता में आने वाली सेना की सर्वोच्च परिषद के ख़िलाफ़ भी नारे लगा रहे हैं.

एक प्रदर्शनकारी ख़ालिद अब्दुल्लाह का कहना है, ''मुझे ये कहने में ज़रा भी डर नहीं है कि मिस्र की सेना ने हमारे लोगों की जान ली है.''

वो आगे कहते हैं,''सेना ने हमारे लोगों की हत्या कर आंदोलन को दबाने की कोशिश की है लेकिन इससे ये आंधी नहीं थमेगी.''

मिस्र में पिछले 30 सालों से आपातकाल लागू है जिसे ख़त्म करने की मांग लगातार बढ़ती जा रही है.

पूर्व शासक होस्नी मुबारक के लगातार भरोसा दिलाने के बाद भी वहां से आपातकाल नहीं हटाया गया था.

हालांकि सेना के सर्वोच्च परिषद के अध्यक्ष फील्ड मार्शल मोहम्मद हुसैन तंतावी के अनुसार आपातकाल के दौरान लागू किए जाने वाले क़ानून को वैसी स्थितियों में ही लागू किया जाएगा जहां 'ठगी की वारदात' होगी.

मिस्र की फौज ने उन लोगों के ख़िलाफ़ की जाने वाली कार्रवाई को सही ठहराने के लिए उन्हें 'ठग' कहा है जो देश में नागरिक शासन की मांग कर रहे हैं.

पिछले साल तंतावी ने आपातकाल के नियमों में फेरबदल कर उनमें मज़दूरों की हड़ताल, ट्रैफिक में बाधा और अफ़वाह फैलाने जैसी घटना को भी शामिल कर लिया था.

इस बीच चुनावों के बाद पहली बार देश में चुनी गई देश की पहली लोकतांत्रिक संसद की सोमवार को बैठक हुई.

बैठक की शुरुआत इस जनआंदोलन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई.

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