अब देश के मुताबिक ट्वीट दिखेंगे

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Image caption एक अनुमान के मुताबिक विश्वभर में 10 करोड़ लोग ट्विटर का इस्तेमाल करते हैं.

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ट्विटर ने ऐलान किया है कि उसने अलग-अलग देश में ट्वीट सेंसर करने की तकनीक विकसित कर ली है.

अपने ब्लॉग में ट्विटर ने लिखा है कि, “आज से हम अपनी वेबसाइट पर लिखे जाने वाली सामग्री को किसी एक देश में रोकने में सक्षम होंगे.”

लेकिन ये सामग्री बाकि दुनिया को दिखाई देती रहेगी. इससे पहले ट्विटर जब भी किसी ट्वीट को हटाता था, वो पूरी दुनिया से एक साथ गायब हो जाती थी.

ग़ौरतलब है कि भारत के मानव-संसाधन और दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कुछ दिन पहले कहा था कि अमरीकी इंटरनेट कंपनियाँ अपनी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों से ‘अपमानजनक’ तस्वीरों और सामग्री हटाने में सहयोग नहीं कर रही हैं.

सिब्बल ने ये भी कहा था कि कुछ इंटरनेट कंपनियां अपने देशों के कानूनों का पालन तो करती हैं लेकिन भारत जैसी दूसरी जगहों पर ऐसा नहीं करतीं हैं. उन्होंने इंटरनेट कंपनियों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया था.

अलग देशों की अलग विचारधाराएं

ट्विटर की ये घोषणा ऐसे समय आई है जब वो विश्वभर में अपना व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

अपने ब्लॉग में ट्विटर ने लिखा है कि उसका कार्यक्षेत्र बढ़ने का मतलब है “अभिव्यक्ति की आज़ादी के बारे में अलग-अलग विचार रखने वाले” देशों में काम करना, उदाहरण के तौर पर फ़्रांस और जर्मनी जो नाज़ी-समर्थक जानकारी पर रोक लगाते हैं.

ट्विटर ने कहा कि अबतक उसने इस तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया है लेकिन अगर इसकी ज़रूरत पड़ी तो जानकारी हटाते वक्त वो लिखने वाले को सूचित करने की कोशिश करेंगे और वेबसाइट पर भी साफ़ तौर पर बताएंगे कि जानकारी कब हटाई गई.

बीबीसी के तकनीक संवादादाता रोरी सेलन जोन्स के मुताबिक वर्ष 2011 में अरब क्रांति से लेकर लंदन में हुए दंगों तक, फ़ेसबुक समेत ट्विटर जैसी अन्य सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटें जानकारी फैलाने में अहम् भूमिका निभाती रही हैं.

ग़ौरतलब है कि चीन में ट्विटर प्रतिबंधित है. वहां एक अन्य सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट, वीबो, बेहद प्रचलित है.

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