लीबिया के जेलों में गद्दाफ़ी समर्थकों को यातनाएं

  • 28 जनवरी 2012
लीबिया यातना इमेज कॉपीरइट BBC World Service

लीबिया में कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी को क़ैद किए जाने और उनकी हत्या के सौ दिन के बाद भी, बीबीसी को इस बात के और सबूत मिले हैं कि उनके पूर्व समर्थकों को जेल में यातनाएं दी जा रही हैं.

क़ैदियों का कहना है कि मिसराता के सैनिक ठिकानों में उन्हें पीटा गया.

दूसरों ने हथियारबंद गुटों के हाथों दुर्व्यवहार की शिकायत की.

चिकित्सा के क्षेत्र में सहायता पहुंचाने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था मेडेसॉं फ्रौंतिये ने शहर के एक क़ैदख़ाने में ये कहते हुए काम रोक दिया है कि वहां यातना की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी हुई है.

बिजली के झटके

बीबीसी संवाददाता गैबरियल गेटहाउस, जो लीबिया के क़ैदखानों में पहुंचने में कामयाब रहे, का कहना है कि बंदियों ने पिटाई किए जाने, बिजली के तारों के कोड़े बनाकर मारे जाने और बिजली के झटके दिए जाने की शिकायत की है.

कई मामलों में बंदियों के साथ ये सारे दुर्व्यवहार जेल में डालने से पहले हो चुके थे.

लेकिन एक व्यक्ति ने कहा कि उन्हें जेल के अस्पताल से सेना के मुख्यालय ले जाया गया, उनके ज़ख़्मी पावों को और आघात पहुंचाया गया, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए दुबारा अस्पताल में भरती करवा दिया गया.

आरोप

मिसराता के सैन्य परिषद के मुखिया ने इन आरोपों से इंकार किया है, और अपने बयान में कहा है कि मेडेसॉं फ्रौंतिये और दूसरे मानवधिकार संगठन गद्दाफ़ी के प्रति नरम रूख़ रखते हैं.

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि तक़रीबन साढ़े आठ हज़ार लोग, जिनमें से ज़्यादातर गद्दाफ़ी समर्थक हैं, मुल्क के जेलों में क़ैद हैं.

इनमें से कई बंदीगृह मिलिशिया के क़ब्ज़े में हैं जो सरकार को जवाबदेह नहीं हैं.

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