अब पुणे में फ़िल्म पर हंगामा

  • 31 जनवरी 2012
फ़ाईल चित्र
Image caption अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा हुआ एक छात्र संगठन है

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् और विस्थापित कश्मीरी हिन्दुओं के संगठन पनुन कश्मीर के विरोध के चलते महाराष्ट्र के पुणे के जाने माने सिम्बिऑसिस कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एंड कॉमर्स ने कश्मीर पर एक फ़िल्म का प्रदर्शन रोक दिया है.

संगठन ही फिल्म को प्रदर्शित करने के खिलाफ थे. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के पुणे के मंत्री शैलेन्द्र दलवी के अनुसार उनका इस फ़िल्म से विरोध इसलिए था क्यों की वो इसे भारतीय सेना के खिलाफ़ मानते हैं.

दलवी के अनुसार इस फ़िल्म में भारतीय फ़ौजियों को अत्याचारी दिखाया गया है पृथकतावादियों को सही इसलिए उनका संगठन इसके खिलाफ था. उन्होंने दावा किया कि संगठन ने कहीं हिंसा का भय दिखा कर आयोजनकर्ताओं को नहीं डराया.

विद्यार्थी परिषद की आपत्तियां

दलवी ने यह भी कहा है कि कॉलेज कश्मीर में फ़ौजियों द्वारा दिए जा रहे योगदान कि चर्चा करता उनके बलिदान की चर्चा तो ठीक था. इस पर जब दलवी से पूछा गया कि अगर कॉलेज उनके सुझाए गए विषयों को बहस में शामिल कर लेता तब क्या वो इस फ़िल्म को दिखाने देते तो उनका उत्तर साफ़ था कि नहीं ऐसा किसी सूरत में नहीं किया जा सकता था.

दूसरी तरफ सिम्बिऑसिस के एक प्रवक्ता ने कहा है कि उन्होंने यह सम्मलेन आगे बढ़ा दिया है. कॉलेज के प्राचार्य ऋषिकेश सोमन ने एक अखबार को बताया कि इस सम्मलेन को आगे बढ़ाने का निर्णय मित्रवत और खुली बातचीत के बाद लिया गया है.

ऋषिकेश सोमन ने यह भी कहा कि यह सम्मलेन आगे होगा और अधिक समग्र होगा. समाचार पत्र ने प्राचार्य के हवाले से आगे कहा है कि वो बिना मतलब का विवाद नहीं चाहते थे और अगर लोग किसी बात को लेकर भावुक हैं तो उनके पास कुछ जायज़ कारण होंगें.

अभी सलमान रूश्दी के ऊपर उठे विवाद की स्याही सूखी भी नहीं थी कि रविवार को दिल्ली में एक चित्रकार के चित्रों को फाड़ डाला गया क्योंकि विरोध करने वालों को उनके द्वारा बनाई गयी नग्न तस्वीरें भारतीय मूल्यों के खिलाफ लगी थी.

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