इतिहास के पन्नों में दो फ़रवरी

  • 2 फरवरी 2012

इतिहास में दो फ़रवरी के नाम कई महत्वपूर्ण घटनाएं दर्ज हैं. इसी दिन द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जर्मनी ने स्टालिनग्राद में समर्पण किया था और दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति डी क्लार्क ने रंगभेद को ख़त्म करने की घोषणा की थी.

1943: जर्मनी ने स्टालिनग्राड में समर्पण किया

Image caption स्टालिनग्राद में सैनिकों ने शून्य से 30 डिग्री कम तापमान में लड़ाई लड़ी थी

इतिहास में दो फ़रवरी 1943 को सोवियत सरकार ने दक्षिणी रूस के स्टालिनग्राड के बंदरगाह पर जर्मन सेना के समर्पण की घोषणा की थी.

इस घोषणा के साथ ही स्टालिनग्राड के लिए पांच महीनों से जारी भीषण लड़ाई ख़त्म हो गई थी.

इस लड़ाई को अब तक के सबसे भयानक युद्ध के रूप में वर्णित किया गया है.

इस लड़ाई में दो दिन के भीतर 45,000 जर्मन सैनिकों को बंदी बनाया गया था. इस तरह पकड़े गए कुल जर्मन सैनिकों की संख्या 90,000 से ज़्यादा हो गई थी.

शून्य से 30 डिग्री नीचे के तापमान वाले युद्ध क्षेत्र में महीनों से लड़ रहे इन सैनिकों की दशा भूख से दयनीय हो गई थी.

ये लोग क़रीब साढ़े तीन लाख की उस जर्मन सेना को हिस्सा थे जिन्हें स्टालिनग्राड पर कब्ज़े के लिए भेजा गया था.

जर्मनी के शासक हिटलर के लिए ये बहुत बड़ी पराजय थी.

1990: डी क्लार्क ने दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद ख़त्म किया

Image caption डी क्लार्क ने नेल्सन मंडेला को रिहा करने का वादा किया था

एक फ़रवरी 1990 को दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति एफ़ डब्ल्यू डी क्लार्क ने रंगभेद ख़त्म करने की मांग करनेवाले अग्रणी संगठन अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस पर लगा 30 साल पुराना प्रतिबंध हटा लिया था.

संसद में दिए उद्घाटन भाषण में राष्ट्रपति क्लार्क ने एएनसी के साथ ही दो अन्य पार्टियों पर लगा प्रतिबंध भी हटाने की घोषणा की थी.

उसी समय डी क्लार्क ने पहली बार सार्वजनिक रूप से एएनसी नेता नेल्सन मंडेला को रिहा करने की घोषणा की थी, हालांकि उन्होंने इसकी कोई नियत तारीख़ नहीं बताई थी.

इन सुधारों के लागू होने पर नेशनल पार्टी के 40 साल के शासन में पहली बार रंगभेद के ख़िलाफ़ कोई पहल हुई थी.

कई पर्यवेक्षक इन सुधारों के विषय क्षेत्र को लेकर आश्चर्यचकित थे जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता वापस क़ायम करने और मृत्युदंड को निलंबित करने का प्रावधान किया गया था.

इस तरह दक्षिण अफ़्रीका में 25 साल से लागू आपातकाल को आंशिक रूप से हटाने का संकेत दिया गया था.

हालांकि सरकार की इस घोषणा के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता आर्कबिशप डेसमंड टूटू और नेल्सन मंडेला की पत्नी विनी मंडेला ने इस पर संदेह व्यक्त किया था.

दूसरे आलोचकों ने आपातकाल को पूरी तरह से हटाने में सरकार की असफलता पर सवाल उठाए थे क्योंकि अशांत क्षेत्रों के टीवी और फ़ोटोग्राफ़िक कवरेज पर लगा प्रतिबंध अभी भी बरकरार था.

हालांकि पश्चिमी देशों ने दक्षिण अफ़्रीका सरकार के इस क़दम की सराहना की थी.

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने डी क्लार्क के इस साहसिक क़दम के लिए बधाई दी थी, वहीं अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने रंगभेद ख़त्म करने की घोषणा का स्वागत किया था लेकिन साथ ही ये भी कहा था कि दक्षिण अफ़्रीका पर लगे प्रतिबंधों को हटाने से पहले कुछ और क़दम उठाने होंगे.

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