सीरिया पर सहमति में बाधा

  • 1 फरवरी 2012
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Image caption सुरक्षा परिषद में कम से कम दो सदस्य, चीन और रूस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ हैं

सीरिया पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पहले दिन की बैठक बिना किसी सहमति ख़त्म हो गई है.

सुरक्षा परिषद को सीरिया में हिंसा ख़त्म करने के लिए राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से हटाने के अरब लीग की योजना पर चर्चा कर सहमति बनानी है.

चर्चा के दौरान क़तर के प्रधानमंत्री ने असद को 'मौत की मशीन' कहा और परिषद के सदस्यों से उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का अनुरोध किया.

लेकिन चीन और रूस ने कहा कि ये योजना सत्ता परिवर्तन की योजना प्रतीत होती है और ये दोनों ही देश अरब लीग की योजना के विरोध में रहे.

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा, "मैं नहीं समझता कि रूस की नीति लोगों को सत्ता छोड़ने के लिए कहने की है."

चीन ने कहा कि सीरिया में बलपूर्वक सत्ता परिवर्तन का प्रयास संयुक्त राष्ट्र की नियमावली के ख़िलाफ़ है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के इसके क़ायदे के ख़िलाफ़ है.

हालांकि अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि इसके बाद कहा है कि प्रस्ताव पर चर्चा जारी रखना चाहिए.

बीबीसी की संयुक्त राष्ट्र संवाददाता बारबरा प्लेट का कहना है कि पश्चीमी देशों को ये उम्मीद थी कि मंगलवार को प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान रूस का रुख़ नरम किया जा सकेगा.

लेकिन ऐसा हो नहीं सका है.

रक्त-पात का दौर

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Image caption सीरिया में प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति असद से सत्ता छोड़ने की मांग कर रहे हैं

कार्यकर्ताओं का कहना है कि सुरक्षा परिषद की बैठक से पहले सोमवार को हुए हिंसक संघर्ष में 100 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.इनमें कम के कम 40 आम नागरिक हैं .

मंगलवार की हिंसा में 30 अन्य लोग मारे गए हैं जिसमें दो बच्चे भी हैं.

हालांकि उनके दावों की निष्पक्ष तौर पर पुष्ठि नहीं हो पाई है.क्योंकि बीबीसी समेत दूसरे अंतरराष्ट्रीय समाचार माध्यम के सीरिया में प्रवेश पर पाबंदी है.

संयुक्त राष्ट्र ने माना है कि वह मरने वालों की कुल संख्या के बारे में पता नहीं लगा सकता.

पिछले साल दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि सीरिया में मार्च में शुरु हुए सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को दबाने की मुहिम में 5,000 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

जबकि सीरिया के अधिकारियों का कहना है कि इस झड़प में 2,000 सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं.

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