मिस्र में दंगों के बाद अधिकारी बर्ख़ास्त

  • 2 फरवरी 2012
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Image caption मैच में पहले से ही तनाव था और मैच ख़त्म होते ही घरेलू टीम के समर्थक मैदान में उतर पड़े

मिस्र के पोर्ट सैद शहर में फ़ुटबॉल मैच के दौरान बुधवार को हुए दंगे के बाद शहर और मिस्र के फ़ुटबॉल संगठन के वरिष्ठ अधिकारियों को बर्ख़ास्त कर दिया गया है.

हिंसा में कम-से-कम 74 लोग मारे गए थे जबकि सैकड़ों लोग घायल हैं.

पोर्ट सैद के गवर्नर ने इस्तीफ़ा दे दिया है. वहीं शहर के सुरक्षा निदेशक और जाँच शाखा के प्रमुख निलंबन के बाद हिरासत में हैं.

फ़ुटबॉल एसोसिएशन को भंग कर दिया गया है और सदस्यों से पूछताछ जारी है.

राजधानी काहिरा में लोगों ने दंगों को रोक पाने में पुलिस की विफलता के विरोध में जुलूस निकाला है.

मिस्र में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया गया है.

कार्रवाई

गुरूवार को काहिरा में संसद की विशेष बैठक बुलाई गई जिसमें दंगे के बारे में चर्चा हुई.

मारे गए लोगों के शोक में एक मिनट के मौन के बाद संसद के स्पीकर ने कहा कि ये दंगे 'शैतानी कृत्य' थे और मिस्र में हुआ विद्रोह 'ख़तरे' में है.

प्रधानमंत्री कमाल अल गंजूरी ने संसद में दंगे के बाद उठाए जा रहे क़दमों की जानकारी दी.

दंगों के बाद गिरफ़्तार किए गए 52 लोगों से पूछताछ की जा रही है.

मिस्र में प्रीमियर लीग फ़ुटबॉल के सारे मैच अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए हैं.

फ़ुटबॉल की शासकीय संस्था फ़ीफ़ा ने मिस्र से इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए कहा है.

ग़ुस्सा

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Image caption काहिरा की फ़ुटबॉल टीम के प्रशंसकों ने दंगे के बाद जुलूस निकालकर नारे लगाए

गुरूवार को काहिरा में अल अहली फ़ुटबॉल टीम के समर्थकों ने प्रदर्शन कर तहरीर स्क्वायर को बंद करवा दिया.

वहीं कई और समर्थकों ने क्लब मुख्यालय से गृह मंत्रालय तक जुलूस निकाला.

बुधवार को पोर्ट सैद शहर में इसी क्लब के साथ एक स्थानीय टीम अल मसरी का मैच चल रहा था जब स्थानीय टीम के समर्थकों ने अल अहली टीम के खिलाड़ियों और समर्थकों पर हमला कर दिया.

अल अहली समर्थकों ने पुलिस पर अक्षमता का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने अशांति को भड़काया.

एक समर्थक मोहम्मद अब्दुल हामिद ने कहा,"लोग सचमुच ग़ुस्से में हैं, आप उनकी आँखों में इस आक्रोश को देख सकते हैं."

मिस्र में पिछले वर्ष राष्ट्रपति मुबारक के ख़िलाफ़ लोकप्रिय प्रदर्शनों के बाद से पुलिस ने अपनी सक्रियता घटा दी है.

काहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता के अनुसार ऐसा लगता है कि कुछ समर्थक छुरे लेगर स्टेडियम में चले गए थे और अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के कारण दंगे भड़क उठे.

तनाव

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Image caption काहिरा में मारे गए लोगों के रिश्तेदार, दंगों में 74 लोग मारे गए

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मैच में शुरू से ही तनाव था क्योंकि काहिरा से आई टीम का एक प्रशंसक एक बैनर लेकर घरेलू टीम का अपमान कर रहा था.

मैच ख़त्म होने के बाद लोग मैदान में घुस गए और उन्होंने अल अहली टीम के खिलाड़ियों और समर्थकों पर हमला शुरू कर दिया.

तब वहाँ पुलिस की एक छोटी टुकड़ी ने खिलाड़ियों को बचाने की कोशिश की मगर भीड़ के सामने वे कमज़ोर पड़ गए.

अधिकारियों के अनुसार अधिकतर मौतें सिर में चोटें लगने से और भगदड़ में दम घुटने से हुईं.

इस बीच मिस्र में हाल में हुए चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरकर आनेवाले गुट मुस्लिम ब्रदरहुड ने हिंसा के लिए पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के समर्थकों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

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