तीन अरब डॉलर का डूबा ख़ज़ाना मिला

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Image caption ग्रेग ब्रुक्स ने दावा किया है कि ख़ज़ाना उन्हें ही मिलेगा

ख़ज़ाने की खोज करने वाले एक अमरीकी ने दावा किया है कि उसने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान डूब गए जहाज़ का पता लगाया है जिसमें प्लेटिनम भरा हुआ है. इसकी वर्तमान क़ीमत तीन अरब डॉलर है.

ग्रेग बुक्स नाम के इस व्यक्ति का कहना है कि एसएस पोर्ट निकल्सन नाम का ये जहाज़ 1942 में डूबा था और इस समय इसके अवशेष अमरीकी अटलांटिक तट से 80 किलोमीटर दूर समुद्र में पड़े हुए हैं.

एसएस पोर्ट निकल्सन एक ब्रितानी व्यावसायिक जहाज़ था जिसे जर्मनी ने टारपीडो किया था.

इसमें छह लोगों की मौत भी हुई थी.

कुछ लोगों ने शंका ज़ाहिर की है कि इसमें प्लेटिनम लदा हुआ है और अब समुद्रीय क़ानून के तहत इस पर मालिकाना हक़ को लेकर झमेले हो सकते हैं.

ब्रितानी सरकार के वकील एंटनी शुस्ता का कहना है कि ये स्पष्ट नहीं है कि इस जहाज़ पर कभी प्लेटिनम भी लदा था.

उन्होंने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "हम अभी भी ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जहाज़ में आख़िर क्या लदा था. हमारी आरंभिक खोज से पता चला है कि इसमें ज़्यादातर मशीनें और सैन्य साज़ोसामान था."

उनका कहना है कि ब्रितानी सरकार पहले उस जहाज़ से सामान निकाले जाने का इंतज़ार करेगी और उसे बाद ही ये तय किया जाएगा कि इसे हासिल करने के लिए दावा किया जाए या नहीं.

'मैं हासिल कर लूंगा'

ग्रेग ब्रुक्स का कहना है कि अमरीकी वित्त मंत्रालय के एक दस्तावेज़ से पता चलता है कि इस जहाज़ में प्लेटिनम की छड़ें लदी हुई थीं, जो युद्ध सामग्री के आपूर्ति के बदले सोवियत संघ ने अमरीका को भुगतान के रूप में दिए थे.

उनका कहना है कि उनके पास इस डूबे हुए जहाज़ का वीडियो फ़ुटेज भी है जिसमें तीन बक्सों के बीच एक प्लेटिनम की छड़ दिखाई दे रही है.

उन्हें लगता है कि इन बक्सों में भी प्लेटिनम ही है.

हालांकि उन्होंने अभी तक एक भी प्लेटिनम की छड़ बाहर लाकर नहीं दिखाई है लेकिन उनका कहना है कि इस महीने के अंत तक वे सामान बाहर निकालना शुरु कर देंगे.

उन्होंने कहा, "मैं हर सूरत में ये ख़ज़ाना हासिल कर लूंगा चाहे इसके लिए मुझे डूबे हुए जहाज़ को बाहर क्यों न निकालना पड़े."

ख़ज़ाने की तलाश करने वाले इस व्यक्ति का कहना है कि वे इसकी घोषणा से पहले चार वर्ष तक इंतज़ार करते रहे क्योंकि वे इसे बाहर निकालने के अधिकारों को लेकर मोल-तोल कर रहे थे.

इस ख़ज़ाने के मालिकाना हक़ का मामला अभी भी नहीं सुलझा है.

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