सीरिया में सत्ता सौंपने की बात मसौदे से हटी

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कूटनयिकों ने सीरिया पर आए प्रस्ताव पर नरम रुख़ अपना लिया है. इसका मकसद रूस को रिझाना बताया जा रहा है क्योंकि रूस ने पहले लिखे प्रस्ताव पर ऐतराज़ जताया था.

बीबीसी ने जो नया मसौदा देखा है उसमें सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद को सत्ता सौंपने की बात शामिल नहीं है. ये अरब लीग शांति योजना का अहम हिस्सा था.

हालांकि नए मसौदे में ‘राजनीतिक बदलाव’ के अरब लीग के फ़ैसले का समर्थन किया गया है.रूस का कहना है कि अरब लीग की योजना का मतलब होगा सत्ता में बदलाव.

सुरक्षा परिषद के नए मसौदे में ये बात भी हटा ली गई है जिसमें सदस्य देशों से कहा गया है कि सीरिया में हथियार आने को वे रोके. रूस ने पहले इस बात पर आपत्ति जताई थी.

नरम रुख़

बीबीसी संवाददाता बाबरा प्लेट का कहना है कि कूटनयिक सूत्रों के मुताबिक पश्चिमी देश नए मसौदे का समर्थन कर रहे हैं जो मोरक्को ने तैयार किया है. लेकिन शर्त ये रखी गई है कि इसे रूस का समर्थन मिलना चाहिए न कि वो मतदान के दौरान ग़ैरमौजूद रहे.

संवाददाता के अनुसार अभी तक रूस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

रूस सीरिया का अहम सहयोगी रहा है. सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बावजूद रूस सीरिया को हथियार भेजता रहा है.

इस बीच मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि मार्च में प्रदर्शन शुरु होने के बाद से सीरिया में सात हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

सीरिया के हमा शहर में सुरक्षाकर्मियों ने सार्वजनिक चौराहों को बंद कर दिया है और नाके बना दिए हैं.

दरअसल 30 साल पहले राष्ट्रपति असद के पिता ने हमा में हुए विद्रोह को कुचल दिया था. गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने इसकी 30वीं बरसी पर सड़कें लाल रंग से रंगी हुई थी. इसी को देखते हुए प्रशासन ने चौराहे बंद कर दिए.

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