इतिहास के पन्नों में तीन फ़रवरी

  • 3 फरवरी 2012

इतिहास के पन्नों में तीन फ़रवरी की घटनाएँ

1986: पोप और मदर टेरेसा ने बीमारों को खाना खिलाया

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Image caption पोप जॉन पॉल ने मदर टेरेसा द्वारा स्थापित निर्मल हृदय को प्रेम से परिपूर्ण घर बताया

पोप जॉन पॉल द्वितीय और मदर टेरेसा की कोलकाता में मुलाक़ात हुई जिसके बाद पोप ने मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटीज़ के अस्पताल में बीमारों से मुलाक़ात की.

जब पोप शहर की झुग्गी बस्ती के बीच में बनी दो मंज़िला इमारत के पास पहुँचे तो मदर टेरेसा उनकी गाड़ी पर चढ़ीं और उन्होंने पोप के हाथों को चूमा.

पोप ने मदर टेरेसा का सिर चूमा और फिर मदर उन्हें 1950 में स्थापित 'निर्मल हृदय' नाम वाले घर में ले गईं.

ये इमारत काली मंदिर के एक हिस्से में बनी है और वहाँ कैंसर, टीबी तथा कुपोषण का शिकार बच्चों का इलाज होता है.

पोप ने वहाँ पर कई बीमारों को चूमा और उन्हें गले लगाकर प्रार्थना करते हुए ईश्वर से कहा कि वह उन 'लोगों को आशीर्वाद दें जो शीघ्र ही उनके पास आने वाले हैं.'

मदर टेरेसा को 1979 में शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया था और उन्हें संत भी कहा जाता रहा. उन्होंने कहा कि पोप की यात्रा उनके जीवन का सबसे ख़ुशी का दिन था.

उस इमारत के बाहर पोप ने कहा था, "निर्मल हृदय उम्मीद की एक जगह है. साहस और विश्वास पर बना एक घर जहाँ प्रेम का शासन है. प्रेम से परिपूर्ण एक घर."

इससे पहले पोप जब नई दिल्ली से कोलकाता पहुँचे तो वहाँ लगभग एक लाख लोगों ने उनका स्वागत किया.

1966: सोवियत रूस ने चाँद पर अंतरिक्ष यान उतारा

रूस ने चाँद पर पहली बार एक अंतरिक्ष यान नियंत्रित ढंग से उतारा है. लूना 9 मॉस्को समय के हिसाब से रात पौने दस बजे चाँद पर उतरा.

उसके बाद यान पर लगे उपकरणों ने तुरंत ही आस-पास के चित्र लेने शुरू कर दिए. ये पहली बार है जबकि चाँद को उसकी सतह के स्तर पर देखा जा रहा है.

सोवियत संघ ने बाक़ी दुनिया के लिए अभी तक कोई तस्वीर जारी नहीं की.

चाँद पर इस यान के उतरने के बाद अमरीकी यान की ओर से भेजी गई उन तस्वीरों की पुष्टि होती है जिसके अनुसार चाँद की सतह सख़्त है और जैसा कुछ खगोल शास्त्री सोचते थे कि वहाँ पर धूल की एक सतह होगी ऐसा नहीं है.

इस बात का सबूत मिलने के बाद कि चाँद पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्री वहाँ किसी दलदल में नहीं धँस जाएँगे, अब चाँद पर पहला मानव भेजने की होड़ और तेज़ हो जाएगी.

टेलीविज़न पर दिखाए गए एक संवाददाता सम्मेलन में एक सोवियत वैज्ञानिक ने बताया कि जहाँ पर लूना 9 यान उतरा था वहाँ चाँद की सतह काफ़ी पथरीली थी.

लूना 9 पर किस तरह के उपकरण थे ये तो गुप्त रखा गया मगर माना जा रहा है कि उन उपकरणों ने वहाँ के तापमान, दबाव और चाँद की सतह की जाँच की होगी. इसके साथ ही धरती तक जानकारी भेजने वाले उपकरण भी भेजे गए होंगे.

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