ब्रिटेन में रह पाएंगे सिर्फ 'सही लोग'

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Image caption सरकार देश में रहने के लिए आने वाले लोगों की संख्या साल 2015 तक कम करना चाहती है

ब्रिटेन के आप्रवासी नीतियों में अहम बदलाव किए जा सकते है. देश के आप्रवासी मंत्री ने कहा है कि प्रस्तावित नीतियों का उद्देश्य केवल ब्रिटेन आ रहे लोगों की संख्या कम करना नहीं होकर ये भी सुनिश्चित करना है कि ऐसे ही लोग देश में आए जो “जीवन यापन के स्तर को ऊपर ले जाते हों.”

ब्रिटेन के आप्रवासी मंत्री डेमियन ग्रीन ने जो दो प्रस्ताव पेश किए है उसका असर भारतीय पेशेवरों और कामग़ारों पर होना तय है.

भारतीयों के बीच लोकप्रिय, पढ़ाई के बाद काम करने का वीज़ा देने का नियम खत्म करने की मंशा सरकार पहले ही जाहिर कर चुकी है.

पहला प्रस्ताव है कि सभी ग़ैर यूरोपीय संघ पेशेवर जिनकी सालाना आय 31,000 पाउंड से कम है उन्हें अपने देश वापस लौटा दिया जाए.

दूसरा ये है कि ब्रितानी नागरिक और वहां रहने वाले लोग जो विदेशियों से शादी करना चाहते है उन्हे अपने पति या पत्नि को ब्रिटेन लाने के लिए सालाना आय 25,000 पाउंड दिखाने होंगे.

आप्रवासी कम करने का उद्देश्य

उद्देश्य है विदेशी पती, पत्नियों को सरकार से वित्तीय मदद पाने से रोकना.

डेमियन ग्रीन ने कहा कि प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की गठबंधन सरकार देश में रहने के लिए आने वाले लोगों की संख्या साल 2015 तक कम करने के अपने लक्ष्य के क़रीब है.

ग्रीन ने लंदन में कहा, “हमें सिर्फ़ ये नहीं जानना चाहिए की कितने लोग यहां आ रहे है बल्कि ये भी देखना चाहिए की सही लोग देश में आ रहे है या नहीं. खास कर वो लोग जिनसे ब्रिटेन को फ़ायदा होगा, वो नहीं जो ब्रिटेन से फ़ायदा उठाने आ रहे है.”

“रईस आप्रवासीयों” पर कथित तौर पर केन्द्रित इस बयान का विरोध भी शुरू हो चुका है.

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