ड्राइविंग पर पाबंदी को क़ानूनी चुनौती

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सऊदी अरब में महिलाओं को वाहन नहीं चलाने दिया जाता. लेकिन अब वहाँ एक नया अभियान शुरु किया जा रहा है जिसके तहत महिलाओं से आग्रह किया जाएगा कि वे इसे क़ानूनी तौर पर चुनौती दें.

इस मुहिम की अगुआई मनाल अल शरीफ़ नाम की महिला कर रही हैं. उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा कि वे सऊदी टीवी स्टेशन पर इस बारे में बात करेंगी. इस अभियान में मनाल अल शरीफ़ प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं.

मनाल की उम्र करीब तीस बरस है और वे काफ़ी पढ़ी लिखी हैं. सऊदी अरब में ड्राइविंग करते हुए पिछले साल उन्हें फ़िल्माया भी गया था.

इस वीडियो को यू ट्यूब पर बहुत हिट मिले थे. इस घटना के बाद उन्हें पकड़ लिया गया था और कई दिनों तक हिरासत में रखा गया था.

क़ानूनी मुहिम

ये घटना सऊदी अरब और बाकी देशों में सुर्ख़ियों में रही थी. ड्राइविंग लाइसेंस की उनकी अर्ज़ी नामंजूर कर दी गई थी जिसक बाद मनाल ने अधिकारियों के ख़िलाफ़ मामला भी दर्ज किया है.

सऊदी अरब में इस तरह का क़ानूनी क़दम उठाने की परंपरा कम ही रही है. अब मनाल बाकी महिलाओं से भी ऐसा ही करने के लिए आग्रह कर रही हैं.

सऊदी अरब में महिलाओं के गाड़ी चलाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है क्योंकि आधिकारिक तौर पर इसकी मनाही नहीं है.

लेकिन धार्मिक मान्यताओं के कारण इसे अच्छा नहीं समझा जाता है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि धार्मिक गुरुओं का मानना है कि इससे सऊदी समाज की नींव नष्ट हो जाएगी, ख़ासकर महिलाओं और पुरुषों के बीच फ़ासले को लेकर.

इस मुद्दे को तूल देने के लिए ईरान जैसी बाहरी शक्तियों को दोषी ठहराया जा रहा है.

लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सऊदी अरब में ही बाग़ी स्वर उठने लगे हैं जिनके मुताबिक इस तरह के प्रतिबंध से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचता है और पुरुष ड्राइवरों के साथ प्रताड़ित होने का ख़तरा बढ़ता है.

मनाल शरीफ़ के मुताबिक ड्राइविंग के अलावा बराबरी के दर्जे से जुड़े दो और मुद्दे हैं जिसमें पारिवारिक क़ानून में बदलाव शामिल है ताकि महिलाओं को और हक़ मिलें. इसके अलावा पुरुष संरक्षक प्रणाली को ख़त्म करने की भी माँग है.

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