'रूस-चीन ने दिया सीरिया को हत्या का लाइसेंस '

  • 5 फरवरी 2012
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Image caption रूस और चीन ने प्रस्ताव पर वीटो किया.

सीरिया में विपक्षी दलों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अरब लीग के प्रस्ताव पर वीटो कर रूस और चीन ने सीरिया की सरकार को लोगों की ‘हत्या का लाइसेंस’ दे दिया है.

विपक्षी दलों के समूह सीरियन नेशनल काउंसिल ने रूस और चीन से अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है.

रूस और चीन के वीटो पर पश्चिमी देशों ने भी नाराज़गी जताई है.

दुनिया भर के कई देशों में सीरिया सरकार के विरोधियों ने सीरिया के दूतावास पर विरोध प्रदर्शन किए और कई जगहों पर दूतावास पर हमले भी हुए.

इस बीच ख़बरों के मुताबिक़ शनिवार को भी कई प्रदर्शनकारी मारे गए.

सीरिया नेशनल काउंसिल ने एक बयान जारी कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया पर लाए गए प्रस्ताव को वीटो करने के लिए रूस और चीन की निंदा की है.

'हत्या का लाइसेंस'

बयान में काउंसिल का कहना है, ''सीरिया नेशनल काउंसिल सीरिया में बढ़ती हत्या और नरसंहार के लिए चीन और रूस की सरकार को ज़िम्मेदार मानती है और उनके इस ग़ैर ज़िम्मेदाराना क़दम को सीरिया सरकार के लिए लोगों की हत्या का लाइसेंस समझती है.''

पिछले साल नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली यमनी नागरिक तवक्कुल कारमान ने भी रूस और चीन की निंदा की है.

जर्मनी में हो रहे एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में भाषण के दौरान तवक्कुल कारमान ने कहा, ‘’बशर अल-असद रूस और चीन की मदद से ये अपराध कर रहे हैं. सुरक्षा परिषद का मक़सद दुनिया में शांति और सुरक्षा को बहाल करना है, ताक़तवर के ख़िलाफ़ कमज़ोरों के साथ खड़ा रहना है और नाइंसाफ़ी का ख़ात्मा करना है. सीरिया में हो रहे जनसंहार के लिए रूस और चीन नैतिक तौर पर ज़िम्मेदार हैं.’’

उन्होंने ट्यूनीशिया की मिसाल देते हुए दूसरे अरब देशों से सीरिया से सारे राजनैतिक रिश्ते ख़त्म करने की अपील की.

संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में सीरिया में जनतांत्रिक और बहुलावादी राजनैतिक व्यवस्था क़ायम करने की बात कही गई थी. भारत और अमरीका समेत सुरक्षा परिषद के 13 सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया था लेकिन रूस और चीन ने इसका वीटो कर दिया था.

रूस और चीन के फ़ैसले पर नाराज़गी जताते हुए संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत सुज़न राइस ने ट्वीटर पर लिखा कि वो काफ़ी चिढ़ी हुई हैं और रूस और चीन के हाथ सीरियाई लोगों के ख़ून से रंगे हुए हैं.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने भी कहा कि रूस और चीन बहुत बड़ी ग़लती कर रहें हैं.

लेकिन चीन ने अपने फ़ैसले का बचाव किया है.

'स्थिति जटिल'

संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत ली बाउडोंग ने कहा कि सीरिया पर प्रस्ताव के उल्टे परिणाम हो सकते थे.

ली बाउडोंग ने कहा, ‘’सीरिया के प्रस्ताव पर बहस के दौरान चीन ने सक्रिय भूमिका निभाई थी. चीन सीरिया समस्या के राजनैतिक समाधान और अरब जगत में स्थायित्व का समर्थन करता है. लेकिन कई दूसरे सदस्यों की तरह चीन का मानना है कि मौजूदा हालात में सीरिया पर ग़ैर-ज़रूरी दबाव डालने और किसी समाधान को थोपने से स्थिति और जटिल हो सकती है.’’

रूस ने भी अपने फ़ैसले का बचाव किया है.

रूस के उपविदेश मंत्री गेनाडी गतिलोव ने अपने देश का बचाव करते हुए ट्वीटर पर लिखा, ''सीरिया के प्रस्ताव को तैयार करने वाले दुर्भाग्यवश थोड़ी सी और मेहनत कर सर्वसम्मति से किसी फ़ैसले पर नहीं पहुंचना चाहते थे.''

सीरिया ने भी रूस और चीन के वीटो का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे सरकार को राजनैतिक सुधार के लिए और अधिक प्रेरणा मिलेगी.

इस बीच सीरिया में बाग़ी लड़ाकों का कहना है कि सेना के टैंक और गोला बारूद होम्स शहर के प्रमुख इलाकों में घुस गए हैं.

होम्स में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उन्हें बताया गया है कि कई इमारतों के अंदर से शवों को निकाला जा रहा है जहां शुक्रवार की रात हमले हुए थे.

लेकिन सीरिया सरकार होम्स में किसी भी भीषण हमले की बात को काल्पनिक बताते हुए उसे ख़ारिज कर दिया है.

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