इतिहास के पन्नों में नौ फ़रवरी

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो नौ फ़रवरी के दिन कई अहम घटनाएं दर्ज हैं.

1950: कम्युनिस्टों के ख़िलाफ़ मैकार्थी का अभियान

Image caption सांसद मैकार्थी ने कम्युनिस्टों के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ दिया था.

अमरीकी सांसद जो मैकार्थी ने 1950 में आज ही के दिन कम्युनिस्टों के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ दिया था.

पश्चिमी वर्जीनिया में एक भाषण के दौरान मैकार्थी ने कहा कि अमरीकी विदेश मंत्रालय में लगभग 200 लोग कम्युनिस्ट हैं. भाषण के दौरान उनके हाथों में एक पन्ना भी था जिसमें उनके अनुसार उन कम्युनिस्टों के नाम लिखे थे.

मैकार्थी ने ये भी कहा कि तत्कालीन अमरीकी विदेश मंत्री डीन एचेसन को 205 लोगों के बारे में जानकारी थी जो विदेश विभाग में काम कर रहे थे और उनकी नीतियों को प्रभावित कर रहे थे.

हालाकि उनके इस बयान के बाद फ़ौरन ही विदेश विभाग के प्रेस अधिकारी लिंकन व्हाईट ने एक बयान जारी कर रहा कि मैकार्थी के आरोप बेबुनियाद हैं.

दरअसल मैकार्थी का ये बयान ऐसे समय में आया था जब चीन की काओमिंताग सरकार का पतन हो गया था और वहां कम्युनिस्ट सरकार सत्ता में आ गई थी जिसके कारण अमरीका को वैश्विक स्तर पर कम्युनिस्ट विचारधारा के फैलने का ख़तरा सताने लगा था.

दो दिनों के बाद उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रुमन को एक ख़त लिखा जिसमें 57 कम्युनिस्टों की सूची बनाने का दावा किया था.

उसके बाद 20 फ़रवरी को उन्होंने संसद में लगभग छह घंटों तक भाषण दिया और 81 लोगों के बारे में बिना उनके नाम लिए ज़िक्र किया.

मैकार्थी के दावों की जांच करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया लेकिन उस समय तक मैकार्थी के पास केवल दस लोगों के नाम रह गए थे जिन्हें वो कम्युनिस्ट समझते थे.

मैकार्थी अपने किसी भी आरोप को साबित नहीं कर सके लेकिन उनके अभियान के कारण अमरीका में कई लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी या फिर उन्हें बदनामी झेलनी पड़ी.

उनके इस अभियान के काण अमरीका के 25 राज्यों ने का़नून बना कर कम्युनिस्ट संगठनों को ग़ैर-क़ानूनी घोषित कर दिया.

विदेश विभाग के बाद मैकार्थी ने सेना पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि वहां भी कई कम्युनिस्टों ने घुसपैठ कर रखी है.

लेकिन सार्वजनिक तौर पर दिखाए गए एक टीवी चैनल पर बहस के दौरान उनकी पोल खुल गई जब वो सेना पर लगाए गए किसी भी आरोप को साबित नहीं कर सके.

1954 में एक संसदीय कमेटी ने उनकी कड़ी आलोचना की थी और ज़्यादा शराब पीने से बिगड़ते सेहत के काण 1957 में सासंद मैकार्थी की मौत हो गई थी.

1983: 'शेरगर' की खोज में आयरलैंड पुलिस

आज ही के दिन 1983 में आयरलैंड के एक मशहूर रेस के घोड़े 'शेरगर' को किसी ने चुरा लिया था और पूरे आयरलैंड में पुलिस उसकी खोज में जुट गई थी.

ये घोड़ा आग़ा ख़ान का था जिसे सात फ़रवरी की रात में किसी ने न्यूब्रीज स्थित उनके फ़ार्म से चुरा लिया था.

आयरलैंड में ये इस तरह की पहली चोरी थी.

शेरगर को 1981 में पूरे यूरोप में साल का सबसे बेहतरीन घोड़ा चुना गया था.

उस समय उसकी क़ीमत लगभग एक करोड़ पाउंड आंकी जाती थी और उस पर तीन लाख पाउंड का इंश्योरेंस भी था.

दस फ़रवरी की रात घोड़े चुराने वालों ने फ़ोन करके 20 लाख पाउंड की फ़िरौती की मांग की लेकिन फिर उन्होंने अपनी मांग को घटाकर 40 हज़ार पाउंड कर दी.

लेकिन घोड़े के मालिकों ने फ़िरौती की रक़म देने से इनकार कर दिया.

बीमा कंपनियों ने भी कोई पैसा देने से इनकार कर दिया क्योंकि शेरगर की मौत की पुष्टि नहीं हो पाई थी.

लेकिन ना तो शेरगर का कभी कुछ पता चला और ना ही इसको चुराने वालों का.

चरमपंथी संगठन आईआरए के पूर्व सदस्य सीन ओ कैलेगन ने बाद में अपनी एक किताब में लिखा कि घोड़े को चुराने वालों ने उसे थोड़ी ही देर बाद मार दिया था क्योंकि वे उसे संभाल नहीं पा रहे थे.

कैलेगन के अनुसार आईआरए ने आग़ा ख़ान से 50 लाख पाउंड की रक़म मांगी थी लेकिन उन्होंने वो रक़म नहीं दी थी.

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