ओडीशा में ज़हरीली शराब पीने से 32 लोगों की मौत

  • 9 फरवरी 2012
Image caption ओडिशा के दो अस्पतालों में 66 लोगों का इलाज चल रहा है.

ओडिशा के कटक में देशी शराब पीन से अब तक 32 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें से 29 क़ी मौत कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज में हुई है जबकि तीन की मौत भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में हुई है.

हितेच अस्पताल के एक डॉक्टर के अनुसार आज अस्पताल में दो लोगों की मौत हुई है, जबकि पांच अन्य बीमार लोगों का इलाज़ चल रहा है. बीमारों में एक की हालत गंभीर है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है.

एससीबी मेडिकल कॉलेज में 29 मौतों की पुष्टि करते हुए अस्पताल के आपात अधिकारी भुबनानंद महाराणा ने बीबीसी से कहा कि अभी 61 और लोगों का अस्पताल में इलाज़ चल रहा है, जिनमें से पांच की हालत गंभीर है.

उन्होंने बताया कि कल देर शाम भी कुछ लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया. गुरुवार सुबह से किसी नए पीड़ित को नहीं लाया गया है, लेकिन इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि और भी लोग इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हो सकते हैं.

मरने वालों की संख्या बढ़ने की संभावना के बारे में उन्होंने कहा कि इस बारे में 48 घंटों के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.

लेकिन कटक के कलक्टर गिरीश एसएन का कहना है कि अब मरने वालों की संख्या बढ़ने की संभावना कम है और जिन लोगों का इलाज चल रहा है उनमें से ज़्यादातर लोगों की स्थिति अब सुधर रही है.

उन्होंने कहा कि ज़हरीली शराब ज़ब्त करने के लिए चार दल बनाए गए हैं और जगह-जगह छापे डाले जा रहे हैं.

बुधवार शाम एक उच्चस्तरीय बैठक में स्थिति का जायज़ा लेने के बाद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पीड़ितों को मुफ़्त में अच्छे से अच्छा देने के अलावा दोषी लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कारवाई करने के आदेश दे दिए हैं.

मुख्यमंत्री ने ओडिशा हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत न्यायाधीश द्वारा पूरे मामले क़ी जांच का आदेश पहले ही दे दिया है.

छापे

ज़हरीली शराब के मामले में अधिकारियों ने भुवनेश्वर स्थित ईस्टर्न इंडिया फ़ार्मास्यूटिकल लेबोरेटरी और चिलिका फ़ार्मास्यूटिकल लिमिटेड नामक इकाइयों पर छापा मारकर उन्हें सील कर दिया है.

आरोप है कि इन्हीं इकाइयों से कथित ज़हरीले पदार्थों की आपूर्ति की गई थी.

कटक के पुलिस आयुक्त बिजय कुमार शर्मा ने कहा कि ज़हरीली शराब का धंधा करनेवाले नौ लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, इनमें से छह लोग खुर्दा ज़िले के भिंगरपुर गांव के रहनेवाले हैं.

उन्होंने कहा,''हमने मारे गए और बीमार हुए लोगों के घरों से इस्तेमाल की गई और बिना इस्तेमाल वाली कई बोतलें बरामद की हैं और उनमें अल्कोहल की मात्रा की रासायनिक जांच के लिए लेबोरेटरी में भेज दिया है.''

पहला मामला नहीं

Image caption ज़हरीली शराब की वजह से मरने वाले लोग आमतौर पर ग़रीब ही होते हैं

ओडिशा में ज़हरीली शराब की वजह से मौत का ये पहला मामला नहीं है.

वर्ष 1992 में कटक में ही इस तरह की शराब पीने से लगभग 200 लोग मारे गए थे.

वर्ष 2009 में भी देसी शराब पीने की दो अलग-अलग घटनाओं में खुदरा ज़िले में 33 लोग मारे गए थे.

भारत के अन्य राज्यों में भी इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं. पश्चिम बंगाल में दिसम्बर 2011 में ज़हरीली शराब पीने से 171 लोग मारे गए थे.

फ़रवरी 2010 में तमिलनाडु में कम से कम 10 लोग मारे गए थे. उत्तरप्रदेश में सितम्बर 2009 में 30 लोगों की जान गई थी. इनसे पहले जुलाई 2009 में गुजरात में लगभग 107 लोग मिलावटी शराब पीने की वजह से मारे गए थे.

ज़हरीली शराब के मामले में गुजरात ने कठोर कदम उठाए हैं जहां अवैध शराब बनाने की सज़ा मौत तय की गई है.

भारत में गुजरात, मिज़ोरम और नगालैंड तीन ऐसे राज्य हैं जहां शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध है.

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