इतिहास के पन्नों में 11 फ़रवरी

अगर इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो आज के दिन ही दक्षिण अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेला को क़ैद से रिहाई मिली थी और ईरान में शाह की सत्ता का ख़ात्मा हो गया था.

1990: मंडेला को क़ैद से रिहाई

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Image caption नेल्सन मंडेला को नॉबेल का शांति पुरुस्कार भी मिला है.

दक्षिण अफ़्रीका में रंग-भेद की नीतियों के ख़िलाफ़ आंदोलन चला रहे नेल्सन मंडेला को 27 सालों की क़ैद के बाद आज के दिन ही रिहाई मिली थी.

उनकी रिहाई से पहले दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति एफ़डबल्यू डी कलार्क सरकार ने रंगभेद से जुड़े कई क़ानूनों में रियायत दी थी. इनमें काले लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहे संगठन अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाया जाना भी शामिल था.

मंडेला स्थानीय समय 1614 बजे अपनी पत्नी विनी के साथ जेल की गेट पर नज़र आए हालांकि वो नियत समय से एक घंटे देर थे.

हल्के भूरे रंग का सूट पहने और टाई लगाए, नेल्सन मंडेला ने पत्नी विनी का हाथ पकड़ रखा था, और जेल से बाहर आकर वो मुस्कुराए और हवा में मुक्का उछाला.

उसके बाद वो चांदी के रंग की बीएमडबल्यू कार में बैठकर केप टाउन की तरफ़ चले गए.

देश भर में लोग इस ख़ुशी में सड़कों और गलियों में नाच रहे थे और उन्हें देखने के लिए केप टाउन में हज़ारों की भीड़ जमा थी.

हालांकि कुछ जगहों पर लोगों ने दुकानों को लूटने की कोशिश की जिसके बाद पुलिस ने गोलियां चलाई जिसमें कई लोगों की मौत हो गई.

नेल्सन मंडेला ने बाद में कहा कि उनकी लड़ाई एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और आज़ादी की जो लड़ाई उन्होंने जारी रखी है वो वापस नहीं जा सकती है.

मंडेला को जून 1964 में राजद्रोह और साज़िश के लिए उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी.

1979: ईरान में ख़ुमैनी की ज़ीत

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Image caption ईरान में हुई क्रांति में काफ़ी लोगों की मौत भी हो गई.

निर्वासन से वापस लौटने के 10 दिन बाद ही, फ़ौजे अपने ठिकानों को लौट गईं और उन्होंने पुराने शासन की तरफ़ से लड़ने का काम एक तरह से छोड़ दिया जिसके बाद आयातुल्लाह ख़ुमैनी के समर्थकों का एक तरह से तेहरान पर क़ब्ज़ा हो गया.

शाह ने एक माह पहले ही शाहपुर बख़्तियार को प्रधानमंत्री का पद सौंपा था लेकिन उन्होंने इस हंगामे के बीच त्यागपत्र दे दिया था और तब से लापता थे.

ईरान रेडियो ने ख़बर दी कि तेहरान के उत्तरी हिस्से में मौजूद उनके घर पर हमला हुआ है और आग लगा दी गई है जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली.

नागरिक सड़कों पर निकल आए थे. उन्होंने पुलिस स्टेशन पर क़ब्ज़ा कर लिया, पुलिस इन जगहों से भाग खड़ी हुई और लोगों ने हथियारों पर क़ब्ज़ा कर लिया.

इन हंगामों की शुरूआत तब हुई जब ख़ुमैनी ने ईरान वापस आने के बाद अस्थायी सरकार का गठन कर दिया.

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