विदेशों में इसराइल पर निशाना क्यों?

  • 14 फरवरी 2012
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Image caption इन हमलों के पीछे की मंशा क्या थी और ये किसकी साजिश थी, ये तो जाँच के बाद ही साफ हो सकेगा

भारत और ज़ॉर्जिया में हुए हमलों के बाद इसराइल ने इन घटनाओं के लिए सीधे ईरान पर आरोप लगाए हैं. कारण समझना मुश्किल नहीं है.

लेकिन प्रश्न ये है कि इसराइली वाहनों, नागरिकों इत्यादि को विदेशों में क्यों निशाना बनाया जा रहा है.

ईरान का परमाणु कार्यक्रम पश्चिमी देशों के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है. इसलिए इसराइल के राजनयिकों पर हमले की बात से मामला बड़ा बनता जा रहा है.

इसराइल के अंदर हमला करना मुश्किल

विशेषज्ञों का मानना है कि इसराइल ने सीधा आरोप ईरान पर इसलिए लगाया है क्योंकि ईरान के कुछ वैज्ञानिकों पर हाल ही में हमले हुए थे.

विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी भी देश के लिए इसराइल के अंदर जाकर हमला करना बहुत मुश्किल है, खासकर ईरान जैसे देश के लिए, जिसकी सुरक्षा एजेंसियाँ कमज़ोर मानी जाती हैं.

इसलिए इसराइल के 'दुश्मनों' के लिए उस पर हमला करने का आसान तरीका है किसी दूसरे देश में इसराइली ठिकानों पर हमला करना.

इन हमलों के पीछे की मंशा क्या थी और ये किसकी साजिश थी, ये तो जाँच के बाद ही साफ हो सकेगा.

लेकिन लंदन स्थित रक्षा विशेषज्ञ हर्ष वी पंत कहते हैं कि यदि आरोपों को सही मान भी लिया जाए तो इन हमलों से ऐसा लग रहा है कि ईरान कह रहा है कि उसके पास भी इसराइल पर दबाव डालने के लिए विकल्प हैं.

पंत कहते हैं कि इसराइल अपने नागरिकों और दूतावासों की सुरक्षा के लिए किसी पर भरोसा नहीं करता है.

हर्ष पंत कहते हैं, “इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद, अमरीकी गुप्तचर एजेंसी सीआईए पर भी भरोसा नहीं करती. इसका कारण है कि इसराइल जिस तरह से अस्तित्व में आया, और खासकर जिस तरह के उसके पड़ोसी हैं.”

रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार भारत के लिए ये अच्छी बात नहीं है कि उसका नाम जॉर्जिया और बैंकॉक के साथ लिया जा रहा है.

इसराइल के बदले

इन देशों में इसराइल जितना भी चाहे, अपने दूतावासों की सुरक्षा नहीं कर सकता. इसलिए पिछले कुछ सालों में इसराइल पर जो हमले हुए हैं वो विदेशी भूमि पर हुए हैं.

सबसे बड़ा उदाहरण म्यूनिख ओलंपिक का है. इन हमलों के बाद इसराइल का बदला सख्त और निश्चित था.

विशेषज्ञ इस ओर ध्यान आकर्षित करते हैं कि म्यूनिख के हमलों के बाद इसराइल ने दोषियों को "चुन-चुन कर मारा."

हर्ष पंत कहते हैं कि इसराइल ईरान का नाम तो ले रहा है लेकिन हो सकता है कि ये किसी दूसरे संगठन का काम हो और अगर ऐसा हो रहा है तो इसराइल के लिए भी बदला लेना मुश्किल हो जाएगा.

उधर ईरान के अंदर भी शक्ति संघर्ष चल रहा है. पंत कहते हैं कि उन्हें आश्चर्य नहीं होगा अगर ये पता चलता है कि इस घटना के पीछे ऐसे लोग हैं जिन्हें आधिकारिक समर्थन हासिल नहीं था.

इसराइल की ओर से ईरान का नाम तुरंत लेने की वजह साफ़ है. इसराइल चाहता है कि सारी दुनिया ईरान को आतंकवादी देश घोषित करे, उसके परमाणु कार्यक्रम को रोका जाए और दुनिया भर का राजनीतिक दबाव ईरान पर पड़े.

पंत के मुताबिक भारत और जॉर्जिया के हमले बहुत प्रभावशाली नहीं थे. इससे ये भी पता चलता है कि जिस संगठन ने भी ये हमले किए उसके पास संसाधनों की कमी है.

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