चीन-अमरीका में 'सामरिक विश्वास' बढ़े: झी

झी जिनपिंग और बराक ओबामा इमेज कॉपीरइट AFP Getty
Image caption मंगलवार को झी जिनपिंग और बराक ओबामा के बीच लंबी मुलाक़ात हुई थी

अमरीका की यात्रा पर गए चीन के उपराष्ट्रपति झी जिनपिंग ने उद्यमियों की एक बैठक में दोनों देशों के बीच 'सामरिक विश्वास' बढ़ाने पर ज़ोर दिया है.

उन्होंने कहा है कि दोनों देशों को आपस में संवाद बढ़ाना चाहिए जिससे कि 'गलतफहमियाँ और संदेह कम हो सके'.

इससे पहले उन्होंने कैपिटल हिल में संसद के दोनों सदनों के नेताओं से मुलाक़ात की थी.

झी अब आयोवा की यात्रा पर हैं, जहाँ वे 1985 में अपनी अमरीका यात्रा के बाद गए थे. इसके बाद वे कैलिफ़ोर्निया जाएंगे.

संवाददाताओं का कहना है कि इस यात्रा से अमरीका को झी की कार्यशैली को नज़दीक से देखने का मौक़ा मिल रहा है, जो चीन के अगले संभावित नेता हैं.

'बहाव को कोई रोक नहीं सकता'

अमरीका-चीन व्यावसायिक परिषद और अमरीका-चीन संबंधों पर राष्ट्रीय परिषद की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए झी ने दोनों देशों के बीच संवाद और दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने पर ज़ोर दिया.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध 'ऐतिहासिक शुरुआत' के मुहाने पर है और दोनों देशों के हित 'एक ऐसी नदी की तरह है जिसके बहाव को अब कोई नहीं रोक सकता'.

अमरीका की ओर से व्यापार असंतुलन को दूर करने के सवाल पर झी ने कहा कि अमरीका को चीन के उत्पादों के आयात पर लगे प्रतिबंधों को हटाना चाहिए.

झी ने संकेत दिए हैं कि विदेश नीति के मामले में भी चीन अमरीका के साथ काम कर सकता है, जिसमें ईरान, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और कोरिया प्रायद्वीप की समस्या शामिल है.

लेकिन इसी के साथ चीनी उपराष्ट्रपति ने एक राज्य की नीति का मामला भी उठाया और अमरीका से अपील की है कि वह ताईवान और तिब्बत के आंदोलनों का विरोध करे.

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमरीका की सामरिक दिलचस्पी के संदर्भ में झी ने कहा, "एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थायित्व और समृद्धि की दिशा में अमरीका की किसी भी सकारात्म भूमिका का चीन समर्थन करता है."

उन्होंने कहा, "लेकिन इसके साथ ही अमरीका को चाहिए कि वह चीन सहित इस क्षेत्र के देशों के हितों और उनकी चिंताओं का भी सम्मान करे."

मुलाक़ात

इससे पहले बुधवार को झी जिनपिंग ने सीनेट में बहुमत के नेता हैरी रीड, विपक्ष के नेता मिच मैककॉनेल और स्पीकर जॉन बोएनर से चर्चा की है.

संवाददाताओं ने आगाह किया था कि हो सकता है कि संसदीय नेताओं से मुलाक़ात के दौरान चीन के संभावित प्रमुख के प्रति उनका रवैया ठंडा हो सकता है.

संसद की ओर से चीन से कई बार अपील की जा चुकी है कि वह व्यापार और मुद्रा को लेकर अपनी नीति बदले क्योंकि ये उसके घरेलू उद्योंगो को अनुचित ढंग से बढ़ावा देती हैं.

इससे पहले मंगलवार को ओबामा प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने कहा था कि हालांकि चीन के साथ उनके नीतिगत मतभेद बरकरार हैं लेकिन वे चीन के साथ मज़बूत रिश्ते को लेकर प्रतिबद्ध हैं.

उपराष्ट्रपति झी के साथ हुई लंबी मुलाक़ात में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी अमरीका और चीन के बीच स्वस्थ्य व्यापारिक रिश्तों पर ज़ोर दिया था.

अमरीका और चीन दो ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ हैं जो एक दूसरे पर बहुत अधिक निर्भर हैं लेकिन अमरीका पिछले दिनों शिकायत करता रहा है कि चीन की मौद्रिक नीति की वजह से अमरीका के विकास पर असर पड़ा है और उसे नौकरियों में कटौती करनी पड़ी है.

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