नॉर्वे में बच्चों से मिले भारतीय दंपति

  • 17 फरवरी 2012
अनुरूप भट्टाचार्य और उनके बच्चे
Image caption नॉर्वे के अधिकारियों का कहना है कि भारतीय दंपति बच्चों की ठीक से देखभाल नहीं कर रहे थे

नॉर्वे में एक भारतीय दंपति को तीन महीने बाद अपने बच्चों से मिलने दिया गया.

नॉर्वे के बाल कल्याण अधिकारियों ने पिछले साल मई में उनके दो छोटे बच्चों को ये कहते हुए उनसे छीन लिया कि वे बच्चों की ठीक से देखभाल नहीं कर पा रहे.

इस घटना को लेकर ख़ासा हंगामा हुआ और भारत सरकार को भी इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा है जिसने नॉर्वे के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है.

फ़िलहाल नॉर्वे के अधिकारी इन बच्चों को उनके चाचा को सौंपे जाने के बारे में विचार किया जा रहा है.

नॉर्वे के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि अगले दो हफ़्ते में इस बारे में कुछ तय कर लिया जाएगा.

मगर बच्चों के माता-पिता का कहना है कि अभी कुछ भी तय नहीं हुआ है और उन्हें बताया गया है कि बच्चों को सौंपे जाने को लेकर देर हो सकती है.

सुनिएः बच्चों की माँ के साथ बातचीत

'बच्ची भूल गई'

नॉर्वे के तीसरे बड़े शहर स्टैवेन्गर में काम कर रहे अनुरूप भट्टाचार्य और उनकी पत्नी सागरिका भट्टाचार्य तीन महीने बाद अपने बच्चों से मिले,

तीन वर्षीय अभिज्ञान और एक वर्षीया ऐश्वर्या - से उनकी कुछ घंटे की मुलाक़ात बाल कल्याण विभाग के एक दफ़्तर में हुई.

माँ सागरिका भट्टाचार्य ने बीबीसी को बताया,"अभिज्ञान को सदमा लगा हुआ था. मगर ऐश्वर्या तो हमें पहचान ही नहीं पाई क्योंकि जब उसे ले गए थे तब वो काफ़ी छोटी थी.

"हम बच्चों के साथ खेले, वहीं घूमे, मगर जब अधिकारियों ने बच्चों को वापस लिया तो हमें बहुत दुःख हुआ"

नॉर्वे के अधिकारियों ने इन बच्चों को फ़िलहाल फ़ोस्टर पेरेंट्स, यानी सौतेले माँ-बाप के पास भेजा हुआ है.

सागरिका ने बताया कि ये फ़ोस्टर पेरेंट्स अधेड़ उम्र के हैं जिनके और भी बच्चे हैं. उन्होंने सागरिका को बताया कि अभिज्ञान उदास रहता है.

विकल्प

नॉर्वे के अधिकारी बच्चों को अनुरूप भट्टाचार्य के भाई अरूणाभाष भट्टाचार्य को सौंपने के बारे में विचार कर रहे हैं.

कोलकाता निवासी अरूणाभाष नॉर्वे पहुँच गए हैं और शुक्रवार को वे भी बच्चों से मिलने साथ गए.

नॉर्वे के बाल कल्याण सुरक्षा विभाग के प्रमुख गुन्नार टोरेसेन ने एक भारतीय टीवी चैनल से कहा है कि वे ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि बच्चे के चाचा बच्चों की कैसे देखभाल करेंगे और इसके लिए वे उनसे बातचीत कर रहे हैं जिसमें और दो सप्ताह लगना चाहिए.

मगर इस मामले में एक पेचीदगी ये है कि नॉर्वे के अधिकारी बच्चों को चाचा को सौंपने के साथ-साथ ये भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि बच्चों के माँ-बाप नॉर्वे से ना चले जाएँ.

सागरिका भट्टाचार्य ने बताया,"उन्होंने हमसे कहा है कि हम साल में दो से तीन बार भारत जा सकते हैं, मगर हमें लौटकर नॉर्वे आना पड़ेगा. तो हमें उन्हें ये विश्वास दिलाना है कि हम नॉर्वे से हमेशा के लिए नहीं चले जाएँगे.

"हम बता नहीं सकते हमपर क्या बीत रही है. हम केवल ये चाहते हैं कि हमारे बच्चे हमारे अपने परिवार के हाथों में चले जाएँ."

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