इतिहास के पन्नों में 19 फरवरी

आज ही के दिन वर्ष 1997 में चीन के नेता डेंग जिआउपिंग की मौत हो गई थी. वर्ष 2001 में आज ही ब्रिटेन में फ़ुट एंड माउथ बीमारी फैलने की ख़बर आई थी.

1997: चीन के नेता की मौत

इमेज कॉपीरइट VT Freeze Frame
Image caption डेंग जिआउपिंग को बचाने की बहुत कोशिश की गई लेकिन आपातकाल उपचार का बहुत असर नहीं हुआ

1997 में आज ही के दिन चीन के तत्कालीन सर्वोच्च नेता डेंग जिएआउपिंग की 92 वर्ष की उम्र में मौत हो गई थी. वो कई साल से बीमार चल रहे थे और उन्हें तीन साल पहले लोगों के बीच देखा गया था.

चीन की सरकारी एजेंसी ने कहा कि उनकी मौत पार्किंसन बीमारी के जटिल स्थिति में पहुँच जाने से हुई थी. फेफड़े के संक्रमण बढ़ जाने से बीमारी की जटिलता बढ़ गई थी.

उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की गई लेकिन आपातकाल उपचार का बहुत असर नहीं हुआ.

हालाँकि डेंग जिआउपिंग सरकारी तौर पर रिटायर हो गए थे, चीन में कोई भी फ़ैसला उनसे पूछे बिना नहीं किया जाता था.

अंतरराष्ट्रीय जगत में उनका नाम 1989 तियानमन स्क्वेयर में प्रदर्शनों को दबाने के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल से जुड़ा था. लेकिन डेंग जिआउपिंग को चीन में आर्थिक सुधार की शुरुआत के लिए भी याद किया जाता है.

1978 में सत्ता में आने के बाद उन्होंने एक नए दौर के सुधारों की शुरुआत की.

उन्होंने सामूहिक कृषि को ख़त्म किया और मुक्त बाज़ार जोन्स की शुरुआत की.

राजनीतिक तौर पर डेंग जिआउपिंग की ख्याति कट्टरपंथ के तौर पर थी. उन्हें विरोधियों पर कड़ी कार्रवाईयों के लिए याद किया जाता है.

तियानमन की घटना के बाद दुनिया भर में उनकी निंदा हुई.

चीन दुनिया की बड़ी सैन्य शक्ति होने के अलावा सबसे घनी आबादी वाला देश है.

इसकी अर्थव्यवस्था तेज़ी से फैल रही है और पूरी दुनिया की निगाहें चीन की ओर हैं. लेकिन चीन में राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं है जिसके लिए उसकी आलोचना भी होती है.

2001: ब्रिटेन में फुट और माउथ बीमारी

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए 40 लाख मवेशियों को मार दिया गया

ब्रिटेन के एसेक्स के कसाईख़ाने में जब फुट और माउथ बीमारी के अंश होने की बात पता चली तो उसके चारों ओर पाँच मील का घेरा बना दिया गया.

दो दिनों के बाद ही फु़ट और माउथ बीमारी की पुष्टि भी हो गई. यूरोपियन कमिश्नर ने तुरंत ब्रितानी दूध, मीट और मवेशियों पर प्रतिबंध लगा दिया.

कसाईख़ाने में मौजूद सभी 300 जानवरों को ख़त्म कर दिया गया ताकि बीमारी को रोका जा सके, लेकिन ये बीमारी पूरे ब्रिटेन में तेज़ी से फैल गई.

अगले एक साल में क़रीब 2,000 जानवरों में ये बीमारी पाई गई.

एक अनुमान के मुताबिक़ ब्रिटेन में इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए 40 लाख मवेशियों को मार दिया गया.

इस बीमारी से मवेशियों से जुड़े उद्योगों को 800 मिलियन पाउंड का नुकसान हुआ और हज़ारों लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ.

ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को भी इससे नुकसान हुआ.

संबंधित समाचार