ईरान पर प्रतिबंध : प्रश्नोत्तर

  • 18 फरवरी 2012
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Image caption ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद हाल में परमाणु संयंत्र में 3000 नए सेंट्रीफ़्यूज और देश में ही परमाणु संवर्द्धित रॉड बनाए जाने की घोषणा की थी

अमरीका और यूरोपीय संघ ने ईरान के कई प्रतिबंध लगा रखे हैं. इन प्रतिबंधों का निशाना ईरान की आय का मुख्य साधन तेल व्यापार है. यह प्रतिबंध ईरान के अपने परमाणु कार्यकर्म को रोकने के लिए दबाव बनाने के लिए हो रहे हैं.

जहाँ पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मकसद परमाणु हथियार हासिल करना है, वहीं ईरान बार-बार कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण मकसदों के लिए है.

क्या ईरान पर पहले से भी कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं?

संयुक्त राष्ट्र ने 2006 और 2010 के बीच ईरान के खिलाफ चार दौर के प्रतिबंधों को अनुमोदित किया है. यह प्रतिबंध इसलिए लगाए गए थे क्योंकि ईरान ने अपने यहाँ यूरेनियम संवर्द्धन और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सहयोग करने से इनकार कर दिया था.

इन प्रतिबंधों में ईरान को आधुनिक हथियार और परमाणु प्रौद्योगिकी की आपूर्ति पर पाबंदी शामिल है. इसके अलावा ईरान के महत्वपूर्ण व्यक्तियों और कंपनियों की दूसरे देशों में मौजूद संपत्ति फ्रीज करने का संकल्प भी इन प्रतिबंधों में शामिल है.

संयुक्त राष्ट्र के ईरान के खिलाफ प्रस्ताव 1929 को 2010 में पारित किया गया था. इन प्रतिबंधो में ईरान द्वारा प्रतिबंधित सामग्री को पाने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्गो निरीक्षण करने का अधिकार भी देशों को दिया गया है.

यूरोपीय संघ ने भी पहले से अपनी तरफ से भी ईरान को उन मशीनों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है जिनका इस्तेमाल यूरेनियम के संवर्द्धन में किया जा सकता है. साथ ही यूरोपीय संघ ने उन लोगों और संगठनों की एक सूची भी जारी की है जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं. इन लोगों और संगठनों के यूरोपीय संघ में प्रवेश करने पर प्रतिबंध है.

यूरोपीय संघ ने साल 2011 में प्राकृतिक गैस के उत्पादन और शोधन के लिए महत्वपूर्ण उपकरणों और प्रौद्योगिकी को ईरान को निर्यात पर प्रतिबंध भी लगा दी है.

इस साल 23 जनवरी को यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों ने ईरानी कच्चे तेल, ईरान के केंद्रीय बैंक से संबंधित संपत्तियों को फ्रीज़ करने की घोषणा भी की है. साथ ही संघ ने ईरानी बैंकों व अन्य सार्वजनिक निकायों के साथ सोने या या अन्य कीमती धातुओं में सभी व्यापार पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.

यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों ने यह भी तय किया है कि संघ के देश ईरान के साथ अपने तेल के पुराने सौदों को क्रमवार तरीकों से जुलाई 1 तक निपटा लें. इसके बाद कोई संघ का देश ईरान से तेल नहीं लेगा. अभी यूरोपीय संघ के देश अपनी ज़रुरत का लगभग 20 फ़ीसदी तेल ईरान से खरीदते हैं.

किन देशों ने ईरान के ऊपर अपने स्तर पर प्रतिबंध लगाया?

अमरीका ने ईरान पर लंबे समय से व्यापक प्रतिबंध लगा रखे हैं. दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध अप्रैल 1980 में टूट गया था. साल 1980 में ईरान में इस्लामी क्रांति के दौरान ईरानी छात्रों ने तेहरान में अमरीकी दूतवास पर कब्ज़ा लिया था व उसके अन्दर मौजूद 50 से अधिक अमरीकी कूटनयिकों और नागरिकों को बंधक बना लिया था.

तब से ही ईरान पर कई अमरीकी प्रतिबंध मौजूद हैं. अमरीका मानता है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का समर्थक है. अमरीका ईरान को मानव अधिकारों के उल्लंघन और आएएईए के साथ असहयोग करने का भी दोषी मानता है.

अमरीकी प्रतिबंधों के अनुसार ईरान के साथ सभी तरह के व्यापार पर भी प्रतिबंध है. अमरीका से ईरान को केवल चिकित्सा और कृषि उपकरण निर्यात किए जा सकते हैं. साथ ही ईरान को सूचना और फिल्म के क्षेत्र में भी मदद दी जा सकती है. अमरीका का कहना है कि वो ईरान के साथ केवल उतना ही व्यापार करेगा जिससे केवल आम ईरानी लोगों को लाभ पहुंचे.

अमरीका के अलावा कनाडा और ब्रिटेन ने भी अपने अपने स्तर पर ईरान के ऊपर प्रतिबंध लगा रखें हैं. ब्रिटेन ने ईरान के सभी वित्तीय संस्थानों के ऊपर प्रतिबंध लगा दिया है.

हाल के वर्षों में स्विट्जरलैंड, जापान, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित कई अन्य देशों ने भी ईरान पर आईएईए के साथ सहयोग की कमी के कारण द्विपक्षीय प्रतिबंध लगा दिए हैं.

क्या दुनिया भर में ईरान के तेल की बिक्री पर प्रतिबंध होगा?

पिछले साल 31 दिसंबर को पास किए गए एक अमरीकी कानून के मताबिक उन बैंकों और वित्तीय संस्थानों के ऊपर प्रतिबंध लगा दिया गया है जिनके ईरान के साथ रिश्ते हैं. इसकी वजह से ईरान को तेल के व्यापार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. ईरान द्वारा निर्यात की जाने वाली तेल की हर बूँद पर प्रतिबंध ईरान को तो प्रभावित करता ही है साथ ही विश्व बाज़ारों में तेल की कीमतें भी बढ़ाता है.

जापान और दक्षिण कोरिया, जो ईरान के तेल का 26 प्रतिशत खरीदते हैं उनका कहना है कि ईरान पर प्रतिबंधों की बात करते वक़्त विश्व अर्थव्यवस्था पर उसके असर को भी ध्यान में रखना चाहिए. इन दोनों देशों ने भी ईरान से अपने तेल के आयात को कम करने की मंशा जताई है.

क्या कुछ देश ईरान पर प्रतिबंधों का विरोध भी कर रहे हैं?

रूस ने ईरान के खिलाफ अब लगने वाले किसी भी प्रतिबंध को अस्वीकार कर दिया है. इसी साल 18 जनवरी को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा थी कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर और प्रतिबंध के लिए गुंजाइश समाप्त हो गई है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था अतिरिक्त प्रतिबंधों की मंशा केवल ईरान में जनता को भड़काने की ही हो सकती है.

इसके अलावा चीन और भारत ने भी संकेत दिया है कि वे ईरान के तेल के आयात पर अंकुश लगाने का इरादा नहीं रखते हैं. इसी साल 16 जनवरी को चीनी विदेश मंत्रालय ने बीजिंग में इस पर आपत्ति जताते हुए किसी एक देश के घरेलू कानून को अंतरराष्ट्रीय कानून के ऊपर रखने के ऊपर भी आपत्ति जताई थी.

तुर्की ने भी संकेत दिए हैं कि वो भी ईरानी तेल पर पाबन्दी नहीं लगाना चाहता. इसी साल 12 जनवरी को ऊर्जा मंत्री तानेर यिल्दिज़ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अलावा कोई भी प्रतिबंध अंकारा के लिए बाध्यकारी नहीं हैं.

ईरान के खिलाफ और अधिक प्रतिबंध लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के अनुमोदन की ज़्यादा संभावना नहीं है क्योंकि रूस और चीन दोनों ने ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नए प्रतिबंधों के खिलाफ वीटो लगाने की बात की है.

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