इतिहास के पन्नों में 23 फ़रवरी

  • 23 फरवरी 2012

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाएंगें कि 23 फरवरी के दिन स्पेन में सेना की एक टुकड़ी ने तख्तापलट की कोशिश की थी, वहीं अमरीकी सेना ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान पर हमला करने के लिए ईवो जीमा टापू पर कब्ज़ा किया था.

1981: विद्रोही सेना का स्पेन पर नियंत्रण

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Image caption 22 घंटे चली भीषण कोशिशों के बाद विद्रोही सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया

23 फरवरी 1981 के दिन स्पेन में राजनीतिक अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई थी, जब दक्षिणपंथी सेना ने प्रशासन का तख़्तापलट कर दिया था.

संसदीय सिविल गार्ड के कुछ 200 सैनिकों और सदस्यों ने स्पेन के संसद के निचले सदन पर धावा बोल दिया और करीब 350 सांसदों को बंदी बना लिया था.

ये सांसद उस समय नई सरकार की गठन के लिए संसद में बहस कर रहे थे.

तख्तापलट की ये योजना पूर्वी स्पेन के वैलेन्सिया में बनाई गई थी और इसकी अगुवाई की लैफ्टिनेंट जनरल जेम मिलान देल बोश ने.

जनरल जेम पूर्व तानाशाह जनरल फ्रैंको के समर्थक थे. उन्होंने आपातकाल की घोषणा कर दी और वैलेन्सिया का गलियों में सैन्य टैंक भेज दिए.

उधर मैड्रिड में विद्रोही सेना ने रेडियो और टेलिविज़न स्टेशनों पर डेढ़ घंटे के लिए कब्ज़ा कर लिया था.

इस घटना से एक सप्ताह पहले ही स्पेन के प्रधानमंत्री अडोल्फो सुआरेज़ ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

कुछ समय बाद स्पेन के महाराजा किंग हुआन कार्लोस ने राष्ट्रीय टेलिविज़न पर जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने स्थिति संभाल ली है और सेना को आदेश दिए जा चुके हैं कि वो तख़्तापलट की इस कोशिश को नाकाम कर दें.

22 घंटे चली भीषण कोशिशों के बाद विद्रोही सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया क्योंकि वे सेना की बाकी टुकड़ियों का समर्थन प्राप्त नहीं कर पाए थे.

1945: अमरीकी झंडा ईवो जीमा में गाड़ा गया

23 फरवरी को साल 1945 में जापान द्वारा नियंत्रित टापू ईवो जीमा पर अमरीका ने अपना झंडा फहराया था.

युद्ध के दौरान ये टापू कूटनीतिक दृष्टि से एक महत्तवपूर्ण कड़ी थी.

प्रशांत महासागर और टोक्यो के बीच 1,045 किलोमीटर की दूरी थी और जापान की राजधानी पर हमला बोलने के लिए ईवो जीमा अमरीकी सेना के लिए एक महत्तवपूर्ण जगह थी.

जापान की सेना और अमरीकी नौसेना के सैनिकों के बीच हुई भीषण लड़ाई के बाद अमरीकी सेना ने अंतत: टापू पर 26 मार्च को कब्ज़ा कर लिया.

इस युद्ध में अमरीकी नौसेना के 74,000 सैनिकों में से एक-तिहाई सैनिक या तो मारे गए या घायल हुए.

कब्ज़ा करने के बाद अमरीका ने इस टापू का इस्तेमाल जापान पर बम गिराने के लिए किया.

समाचार एजेंसी असोसिएटिड प्रेस के एक फोटोग्राफर जो रोज़नथल ने टापू पर अमरीकी झंडा फहराते हुए जो तस्वीर ली, उसे पुलित्ज़र पुरस्कार मिला.

युद्ध की समाप्ति के बाद 1948 में ईवो जीमा टापू को जापान को सौंप दिया गया.

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