'ऐसा भी नहीं कि बच्चे अनाथ हैं और उनका कोई वतन नहीं'

  • 23 फरवरी 2012
Image caption नॉर्वे के अधिकारियों का कहना है कि भारतीय दंपति बच्चों की ठीक से देखभाल नहीं कर रहे थे

नॉर्वे में एक भारतीय दंपति से अलग किए गए उसके बच्चों के मामले में भारत सरकार ने कहा है कि ये बच्चे अनाथ नहीं हैं और ऐसा भी नहीं है कि उनका कोई वतन नहीं है.

भारत सरकार ने ये भी कहा है कि इन बच्चों को उसका संरक्षण हासिल है और उनका रेज़ीडेंट परमिट बढ़ाने का आग्रह उनके मातापिता या भारत की ओर से ही किया जाना चाहिए.

नॉर्वे सरकार ने मामले के मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए इन बच्चों को भारत को लौटाने की प्रक्रिया तेज़ करने का एक बार फिर अनुरोध किया गया है.

ये भी रेखांकित किया गया है कि बच्चों के स्वदेश लौटने के बाद उनके हितों की रक्षा के लिए भारत में कड़े क़ानूनी और संस्थागत अधिकार हैं.

नॉर्वे में काम कर रहे अनुरूप भट्टाचार्य और उनकी पत्नी सागरिका भट्टाचार्य को तीन महीने बाद बीते हफ्ते अपने बच्चों से मिलने की इजाजत दी गई थी.

तीन वर्षीय अभिज्ञान और एक वर्षीया ऐश्वर्या से उनकी कुछ घंटे की मुलाक़ात बाल कल्याण विभाग के एक दफ़्तर में हुई थी.

नॉर्वे के बाल कल्याण अधिकारियों ने पिछले साल मई में उनके दोनों बच्चों को ये कहते हुए उनसे छीन लिया कि वे बच्चों की ठीक से देखभाल नहीं कर पा रहे.

इस घटना को लेकर ख़ासा हंगामा हुआ और भारत सरकार को भी इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा है जिसने नॉर्वे के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है.

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