'वर्ना ये भी रेड कॉरीडोर में होगा'

मनोज शर्मा
Image caption मनोज शर्मा का दावा है कि अगर किसानों को न्याय ना मिला तो उत्तर प्रदेश में भी माओवाद पाँव पसारेगा.

अर्थशास्त्र में एमऐ मनोज शर्मा आगरा के पास बसे अपने गावं छलेसर के पास सड़क पर एक ढाबा चलाते हैं. शर्मा ने पिछले दो साल से दाढ़ी नहीं बनवाई है. उनका कहना है कि वो दाढ़ी तभी बनवाएंगें जब मायावती सरकार से बाहर हो जायेगीं.

उनकी दुकान के सामने जिस जगह पर तेज़ी से बड़ी बड़ी मशीने सडकें और इमारतें खड़ी करने में लगीं हैं उन जगहों पर कभी शर्मा के खेत होते थे. मनोज शर्मा के ऊपर गुंडा एक्ट लागू है और वो छह सात मुकदमों में आरोपित आदमी के रूप में शामिल हैं. उनके अलावा उनके दो चाचाओं के खिलाफ भी कई आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दिए गए.

मनोज के नब्बे साल के पिता चन्द्र भान शर्मा का कहना है कि पुलिस ने उन पर भी गुंडा एक्ट लगा दिया था जिसे उन्होंने किसी तरह से प्रशासन के अधिकारयों से लड़ झगड़ कर हटवाया.

मनोज का दावा है कि उन पर तमाम मुक़दमे इसलिए लगाए गए क्योंकि उनके परिवार ने मुख्यमंत्री मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट कहे जाने वाले यमुना एक्सप्रेस वे के लिए अपनी ज़मीन देने से इनकार कर दिया था.

विवादित परियोजना

यमुना एक्सप्रेसवे जिसे किसी ज़माने में ताज एक्सप्रेसवे के नाम से जाना जाता था इसे आगरा और दिल्ली के बीच में यात्रा के समय को कम करने के लिए बनाया जा रहा है.

इस यमुना एक्सप्रेस वे के लिए नोएडा से छलेसर तक एक सौ पैंसठ किलोमीटर लम्बाई में तीन किलोमीटर चौड़ी पट्टी अधिग्रहीत की जा रही है. इसमें बीच-बीच में पांच आधुनिक नगर, बाजार और एयरपोर्ट बनाने का भी प्रस्ताव है.

मनोज शर्मा का कहना है, "अगर जमीन का अधिग्रहण सरकार या किसी सार्वजनिक उपयोग के कम के लिए होता तो किसान विरोध न करते , लेकिन यह पूरी परियोजना केवल एक उद्योग समूह को फायदा पहुंचाने के लिए है."

‘जबरन अधिग्रहण’

मनोज शर्मा का दावा है कि जब उनके गांव के लोगों ने मुआवजा लेने से मना कर दिया तो सरकार ने गाँव में पुलिस और पीएसी के कैम्प लगाकर किसानों पर फर्जी मुक़दमे कायम कर दिए और थाने में बैठाकर जबरदस्ती करारनामा लिखवा लिया. मनोज शर्मा का कहना है कि उसने करारनामे पर दस्तखत नही किये इसलिए उसे जेल जाना पड़ा.

मनोज के गावं छलेसर के अलावा टप्पल और भट्टा परसौल ये तीन गाँव हैं जिनके किसानों ने धरना – प्रदर्शन और आंदोलन किया. आंदोलन करने वाले चौदह किसान पुलिस फायरिंग में मारे गए और एक लापता है.

किसानों की मौत के बाद कॉंग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने इन किसानों के बीच पहुँच कर सरकार को खूब कोसा.

कॉंग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों ने भी इस परियोजना केलिए मायावती सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

लेकिन मनोज शर्मा या उनके परिवार को किसी भी राजनितिक दल से कोई उम्मीद नहीं है. मनोज शर्मा का कहना है "सभी राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं से इन परियोजनाओं को बनाने वाले जेपी उद्योग समूह से अच्छे संबंध हैं. इसीलिए राजनीतिक दलों से उनके आंदोलन को बहुत समर्थन नही मिला. हाँ अब चुनाव के समय जरुर सभी वादे कर रहें हैं."

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Image caption यमुना एक्सप्रेसवे के खिलाफ आन्दोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में 14 किसान मारे गए थे

उत्तर प्रदेश में विभिन्न नदियों और नहरों के किनारे इस तरह की दस ग्यारह योजनाये हैं, जिनसे लगभग 46000 हजार गाँवों के लोग प्रभावित हो रहें हैं.

बलिया से नोएडा तक 1050 किलोमीटर गंगा एक्सप्रेस वे परियोजना इनमे से प्रमुख है जिस पर फिलहाल अदालत ने रोक लगा दी है.

‘नाउम्मीद नहीं’

सन 2009 के लोक सभा चुनाव में मायावती की बहुजन समाज पार्टी बलिया से नोएडा तक प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेस वे क्षेत्र की लगभग सारी लोक सभा सीटें हार गयी थीं.

मनोज शर्मा और उनके परिवार को डर है कि अगर मायावती इस विधान सभा चुनाव से दोबारा सत्ता में आ गयी तो ये 46000 गाँव बर्बाद हो जायेंगे.

शर्मा पूरी तरह से नाउम्मीद भी नहीं हुए हैं. वो कहते हैं कि " प्रशासन और न्यायपालिका से न्याय नही मिला लेकिन अब लोकतंत्र में चुनाव से ही उम्मीद है."

अगर इस चुनाव से भी उनके हिसाब से न्याय ना निकला तो ?

इस सवाल के उत्तर में शर्मा कहते हैं "तो यह इलाका भी झारखंड और छत्तीसगढ़ की तरह लाल कोरिडोर में शामिल हो सकता है."

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