सीरिया के विद्रोही गुटों को हथियार नहीं

  • 25 फरवरी 2012
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Image caption ट्यूनिशिया की राजधानी में हुई बैठक में पश्चिमी और अरब देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

सीरिया में जारी हिंसा पर ट्यूनिशिया की राजधानी ट्यूनिस जमा हुए 60 देशों के प्रतिनिधियों ने सीरिया के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा करने और विद्रोहियों के मुख्य गुट - सीरिया राष्ट्रीय काउंसिल को प्रतिपक्ष के 'विश्वसनीय' प्रतिनिधि के तौर पर मानने का निर्णय लिया है.

हालांकि ये साफ़ किया गया है कि दूसरे विद्रोही गुटों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाएगा, यानि सीरिया राष्ट्रीय काउंसिल को संभावित सरकार के तौर पर मान्यता नहीं मिल पाई है.

ट्यूनिस में हुई एक दिवसीय बैठक को, 'सीरिया के मित्र' की संज्ञा दी गई.

बैठक का मुख्य उद्देश्य था राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार पर इस बात के लिए दबाव बनाया जाना कि वो फ़ौरन लड़ाई को रोकें और प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाने के रास्ते खोले जा सके.

घोषणा-पत्र

सम्मेलन के अंत में जारी एक घोषणा-पत्र में सीरिया की सरकार से हिंसा को तुरंत रोकने की मांग, और मानवीय सहायता मुहैया करवाए जाने के लिए सुविधा देने की बात कही गई है.

घोषणा पत्र में ये भी कहा गया है कि सीरिया के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिंबधों को और कड़ा किया जाएगा जिसके लिए यात्राओं पर प्रतिबंध लगाने, बाहर जमा संपत्ति के इस्तेमाल पर रोक और तेल के व्यापार पर रोक लगाया जाएगा.

ये भी कहा गया है कि सीरिया के साथ राजनयिक संबंधों को कम किया जाएगा और हथियारों की सप्लाई बंद कर दी जाएगी.

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Image caption रेड क्रास और रेड क्रिसेंट के दल होम्स से घायलों को निकालते हुए.

बयान में कहा गया है कि ये सीरिया की सरकार के लिए साफ़ संदेश है कि वो आम शहरियों पर हमले जारी नहीं रख सकता है.

बैठक के दौरान सऊदी अरब के विदेश मंत्री सऊद अल-फ़ैसल ने विद्रोही गुटों को हथियार मुहैया करवाने के सुझाव का समर्थन किया.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए एक क्षेत्रीय आधारभूत संरचना तैयार करने पर सहमति बनी है और कई देशों ने इसके लिए आर्थिक मदद देने का वायदा किया है.

अमरीका

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी किलंटन ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा, "सीरिया की सरकार पर दबाव बढ़ाया जाएगा और लोकतांत्रिक परिवर्तन के लिए रास्ते तैयार किए जाएंगे.

हिलेरी किलंटन ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का विरोध करने के लिए रूस और चीन की निंदा की और उसे घृणित बताया.

दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के विरूद्ध वीटो का इस्तेमाल कर इसे रूकवा दिया था.

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Image caption होम्स में पिछले कई दिनों से हमले जारी हैं और काफ़ी लोगों की मौत हो चुकी है.

रूस और चीन ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया है.

कार्यकर्ताओं का कहना है कि 11 महीनों से जारी विद्रोह के दौरान सात हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

उन्होंने कहा कि गुरूवार को ही देश भर में 90 से अधिक लोग हिंसा का शिकार हुए.

उदाहरण

बेरूत से बीबीसी संवाददाता पॉल वुड का कहना है कि सीरिया राष्ट्रीय काउंसिल को पुर्ण मान्यता न दिए जाने की वजह है कि सीरिया में विद्रोही अभी भी कई गुटों में बंटे हैं.

साथ ही मित्र देश चाहते हैं कि सीरिया में मौजूद सुरक्षा ढांचे को बना रहने दिया जाए ताकि वहां इराक़ जैसी स्थिति न पैदा हो कि सरकार गिरने के बाद अव्यवस्था के हालात पैदा हो जाएं.

पश्चिमी देश विद्रोहियों को हथियार देने के पक्ष में भी नहीं हैं

लेकिन पॉल वुड का कहना है कि हालात ये हैं कि अगर विद्रोहियों को हथियार दिए जाते हैं तो गृह युद्ध की स्थिति बनेगी और अगर नहीं तो मुल्क में महीनों से जारी हिंसा का दौर यूं ही चलता रहेगा.

रेड क्रास

इस बीच अंतरराष्ट्रीय रेड क्रास और रेड क्रिसेंट के दलों ने होम्स शहर पहुंचकर वहां से औरतों, बच्चों और घायलों को निकालने का काम शुरू कर दिया है.

दिन में चली बातचीत के बाद रेड क्रिसेंट के एंबुलेंस बाब अम्र के इलाक़े में जाकर लोगों को वहां से हटा रहे हैं.

इस इलाक़े में पिछले चंद दिनों से सुरक्षाबलों के हमले जारी हैं.

वहां मौजूद घायल पत्रकार उन लोगों में शामिल हैं जो वहां से निकलना चाहते हैं लेकिन अभी साफ़ नहीं है कि क्या वो इसमें सफल रहे हैं.

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