इतिहास के पन्नों में: 29 फ़रवरी

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Image caption राहत कार्य में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी सहायता की

इतिहास के पन्नों में 29 फ़रवरी का दिन

1960- मोरक्को के भूकंप में हज़ारों की मौत

मोरक्को के दक्षिणी शहर अगादीर में आए भीषण भूकंप में हज़ारों लोगों की मौत हो गई.

भूकंप के बाद मलबे में दबे लोगों को बचाने का काम शुरू कर दिया गया. दबे लोगों में पर्यटक भी शामिल थे.

अगादीर शहर के अधिकतर नए हिस्से पूरी तरह ध्वस्त हो गए और घनी बस्ती वाले टाल्बोरिट इलाक़े में सबसे ज़्यादा लोग प्रभावित हुए.

मारे जाने वालों की संख्या एक हज़ार तक होने का अनुमान है मगर कुछ लोगों को आशंका है कि ये संख्या 20 हज़ार तक हो सकती है.

इस भूकंप की तीव्रता 6.7 थी और स्थानीय समयानुसार रात के 11 बजकर 39 मिनट पर ये भूकंप आया.

भूकंप लगभग 10 सेकेंड रहा जिसके बाद शहर में आग भी लग गई.

प्रत्यक्षदर्शियों ने मलबे में दबे लोगों को मदद के लिए चिल्लाते हुए सुना.

मोरक्को के प्रमुख शहरों के अलावा दुनिया भर के शहरों से बचाव दल वहाँ पहुँचने लगे. घायलों के लिए अगादिर हवाई अड्डे को अस्थाई अस्पताल में तब्दील कर दिया गया.

शहर का मुख्य अस्पताल भी मलबे में तब्दील हो चुका था.

1996- सरायेवो की घेराबंदी हटी

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Image caption इलिजास इलाक़े पर बोसनिया सरकार का फिर से नियंत्रण हो गया

चार साल तक लगातार गोलीबारी और हमलों के बाद बोसनिया की राजधानी सरायेवो की घेराबंदी खत्म हो गई.

मुसलमानों के नेतृत्त्व वाली बोसनिया सरकार ने इलिजास इलाक़े पर फिर से क़ब्ज़ा कर लिया और राजधानी को बाक़ी बोसनिया से जोड़ने वाली अहम सड़क पर भी उनका नियंत्रण हो गया.

डेटन शांति समझौते के प्रावधानों के तहत बोसनियाई सर्ब लोगों को पाँच इलाक़ों का नियंत्रण मुसलमानों के नेतृत्त्व वाले क्रोएशियाई नेतृत्त्व को सौंप देना था.

शहर पर उनका क़ब्ज़ा अप्रैल 1992 से था जब मुसलमानों क्रोएशियाइयों के एक गठबंधन ने स्वतंत्र बोसनिया के जनमतसंग्रह में अधिक मत हासिल कर लिए.

पाँच इलाक़ों पर से नियंत्रण हटा लेना, डेटन संधि का सबसे संवेदनशील मामला था और उसी के चलते सर्बियाई नागरिकों ने प्रदर्शन भी किया था. उनका कहना था कि वे मुसलमानों के साथ रहने के बजाए अपना घर छोड़ देना पसंद करेंगे.

संयुक्त राष्ट्र के एक आँकड़े के अनुसार इलिजास में युद्ध की समाप्ति के समय 17 हज़ार लोग रहते थे जो कुछ समय बाद घटकर सिर्फ़ दो हज़ार रह गए.

लगभग 44 महीनों तक चले इस युद्ध में 10 हज़ार लोग मारे गए और उनमें से भी 1800 बच्चे थे.

सर्बियाई लोगों के सरायेवो छोड़ने से उसे संयुक्त बोसनिया की बहुदेशीय राजधानी बनाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को भी झटका लगा.

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