ब्रितानी विरोध के बीच वित्तीय समझौते पर दस्तखत

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Image caption यूरोपियन परिषद् के अध्यक्ष हैमन वैन रैम्पाओ ने ब्रिटेन के आरोपों से इनकार किया है

यूरोप में ब्रिटेन और चेक गणराज्य को छोड़ कर यूरोज़ोन के बाकि सभी देशों के नेता अपने-अपने देशों के बजट को संयमित करने के लिए राज़ी हो गए हैं.

इस समझौते के ज़रिए यह कोशिश की जा रही है कि यूरोज़ोन के देश फिर से अपने लिए बड़े बड़े बजट घाटे ना पैदा कर लें. इस समझौते के पास होने के बाद अब यूरोज़ोन के हर सदस्य देश के नेता को अपने अपने देश में इसकी पुष्टी करनी होगी. केवल आयरलैंड में इस बारे में एक जनमत संग्रह होगा.

ब्रिटेन और चेक गणराज्य, यूरोज़ोन के ऐसे दो देश हैं जिन्होंने इस समझौते पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया है.

इन दोनों देशों का कहना है कि इस संधि में लालफीताशाही को कम करने और व्यापार को बढ़ाने का कोई रास्ता नहीं है.

हालाँकि यूरोपियन परिषद् के अध्यक्ष हैमन वैन रैम्पाओ ने ब्रिटेन के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि ब्रिटेन की बातों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए जा रहे हैं.

जल्द परीक्षा

इस समझौते पर आलोचकों का कहना है कि यह समझौता महज़ एक राजनीतिक कदम है जिसे जर्मनी के करदाताओं को संतुष्ट करने के लिए उठाया गया है. जर्मनी में आर्थिक संकट में फंसे दूसरे यूरोज़ोन के देशों की मदद करने के लिए आम लोगों में कोई उत्साह नहीं है.

जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्कल ने इस समझौते को एक बहुत बड़ा कदम करार दिया है. इस समझौते के पहले दिसंबर में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने बजट घाटे को कम करने से संबंधित एक समझौते को वीटो कर दिया था.

बीबीसी के यूरोप संपादक का कहना है कि इस ताज़ा समझौते की पहले परीक्षा आर्थिक संकट से जूझ रहे स्पेन में होगी. नीदरलैंड्स ने भी कहा है कि वो भी बजट घाटे को कम करने की तय समयसीमा के भीतर अपने लक्ष्यों को नहीं छू पाएगा.

यूरोपियन परिषद् के अध्यक्ष हैमन वैन रैम्पाओ ने समझौते पर देशों के दस्तखत के लिए सम्मलेन में कहा " हममें से हर एक को बजट घाटे के लिए कठोर आत्मनियंत्रण कठिन होगा. यह देशों को क़र्ज़ के संकट में पड़ने से बचाएगा. इस समझौते से सदस्य देशों के बीच विश्वास बढे़गा जिसकी वजह से आर्थिक प्रगति होगी और नौकरियाँ आएंगीं."

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