इतिहास के पन्नों में 5 मार्च

इतिहास के पन्नों को पलटेंगें तो पाएंगें कि आज ही के दिन1953 में सोवियत संघ में जॉसेफ स्टालिन की मौत की खबरें आग की तरह फैल गई थीं, तो उधर 1966 में जापान में एक विमान दुर्घटना में 124 लोग मारे गए थे.

1953: जॉसेफ़ स्टालिन ‘मौत की कगार पर’

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Image caption जॉसेफ स्टालिन ने 1928 में सोवियत संघ की सत्ता संभाली थी

5 मार्च 1953 के दिन सोवियत संघ के जाने-माने नेता जॉसेफ स्टालिन की मौत की अफवाहें आग की तरह फैलनी शुरू हुई थी.

एक आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया कि 1928 में सोवियत संघ की सत्ता संभालने वाले जॉसेफ स्टालिन को दिमाग हैमरेज हो गया है.

इस बीच सोवियत संघ के अखबार पाठकों को ये दुखद खबर सुनाने की तैयारी में जुट गए. अखबारों के पहले पन्नों पर स्टालिन के स्वास्थय से जुड़ी खबरें छपने लगीं.

उधर विश्व भर के नेता स्टालिन को शुभकामनाएं भेज रहे थे.

अंतत: छह मार्च के दिन जॉसेफ स्टालिन की मौत की आधिकारिक घोषणा कर दी गई.

उनके शव को देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़ मॉस्को के रेड स्क्वेयर पर जमा हो गई थी.

लेकिन शासक निकिता क्रुश्चेव ने एक मुहिम चलाई जिसमें उन्होंने स्टालिन को एक तानाशाह की संज्ञा दी और उन्हें लाखों लोगों की मौत का ज़िम्मेदार ठहराया.

क्रुश्चेव ने कहा कि वो चाहते हैं कि पिछले 30 वर्षों से स्टालिन के आभामंडल से प्रभावित सोवियत संघ की जनता उससे बाहर निकले.

उन्होंने इसका भी विस्तार से वर्णन किया कि किस तरह से 193-38 के दौरान कई लोगों की हत्या की गई थी. क्रुश्चेव के अनुसार वे सारी हत्याएं स्टालिन की शह पर की गई थी.

1966: यात्री जेट प्लेन माउंट फूजी में दुर्घटनाग्रस्त हुआ

5 मार्च 1966 के दिन जापान के माउंट फूजी में एक बोइंग 707 प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें 124 लोग मारे गए थे.

ये विमान ब्रिटिश ओवरसीज़ एयरवेज़ कॉरपोरेशन का था और टोक्यो अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से उड़ान भरने के 25 मिनट के भीतर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.

एक महीने की अवधि के भीतर ये तीसरा अमरीकी विमान था, जो इस इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था.

इससे पहले फरवरी में एक बोइंग-727 विमान टोक्यो में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था जिसमें 133 लोग मारे गए थे.

इस विमान दुर्घटना की जांच के लिए दो ब्रितानी टीम और अमरीकी विमान एरोनॉटिक बोर्ड के एक अधिकारी को जापान भेजा गया.

जांच में पाया गया कि जापान के सबसे ऊंचे पहाड़ माउंट फूजी के पास तेज़ हवा के झोंकों के कारण प्लेन का संतुलन बिगड़ गया था जिसके बाद विमान के भाग टूट कर इधर-उधर गिरने लगे थे.

ऐसा भी माना गया कि विमान के पाइलट ने यात्रियों को माउंट फूजी का नज़ारा दिखाने की कोशिश की होगी, जिसके बाद अचानक वातावरण में हुई हलचल के कारण विमान अपना संतुलन खो बैठा.

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