इतिहास के पन्नों में - नौ मार्च

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो नौ मार्च के दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी थीं.

1967: स्टैलिन की पुत्री ने देश छोड़ा

Image caption स्वेतलाना के इस फैसले ने सबको चौंका दिया था.

आज ही के दिन 1967 में तत्कालीन सोवियत संघ के नेता जोसेफ स्टैलिन की पुत्री स्वेतलाना अलीलुयेवा देश छोड़ कर चली गई थीं.

सोवियत संघ छोड़ने के बाद वो नई दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास पहुंच गई और अमरीका में राजनीतिक शरण की मांग की.

1953 में उनके पिता स्टैलिन की मौत के बाद से स्वेतलाना के बारे में कुछ ज्यादा जानकारी नहीं थी कि वो कहां है और क्या कर रही हैं. बस इतनी जानकारी थी कि वो मॉस्को में ब्रितानी दूतावास के पास एक फ्लैट में रह रही थी.

1964 में स्वेतलाना ने एक भारतीय राजनयिक ब्रजेश सिंह से शादी कर ली थी. ये स्वेतलाना की तीसरी शादी थी.

स्वेतलाना जब भारत पहुंची तो उन्हें भारत सरकार यहां नहीं रहने देना चाहती थी.

बाद में स्वेतलाना स्वीट्जरलैंड चली गईं और फिर अप्रैल 1967 में वो अमरीका चली गईं.

अमरीका पहुंचकर न्यूयॉर्क में उन्होंने एक प्रेस कॉंफ्रेंस में अपने पिता के कार्यकाल की जम कर आलोचना की.

वो अमरीकी नागरिक हो गईं और अपना नाम बदलकर लाना पीटर्स रख लिया. उन्होंने अमरीका में ही विलियम पीटर्स नाम के एक आर्किटेक्ट से 1970 में चौथी शादी की.

लेकिन उनसे भी उनका तलाक हो गया. 1984 में वो सोवियत संघ वापस लौट गई और अपने पिता के पैतृक घर जॉर्जिया में बस गईं.

1986 में एक दफा फिर वो अमरीका चली गई और फिर 90 के दशक में वो ब्रिटेन में जाकर बस गई.

पिछले साल नवंबर में उनके पूर्व पति ब्रजेश सिंह की मौत हो गई थी जिनके अस्थि विसर्जन के लिए वो दिंसबर 2011 में भारत भी आई थीं.

1973: उत्तरी आयरलैंड ने ब्रिटेन के पक्ष में वोट दिया

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption उत्तरी आयरलैंड में कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट ईसाइयों के बीच अक्सर हिंसा होती रहती है.

आज ही के दिन 1973 में उत्तरी आयरलैंड में हुए एक जनमत संग्रह में जनता ने ब्रिटेन के साथ रहने के पक्ष में वोट डाला था.

लगभग 57 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा था कि वे ब्रिटेन के साथ ही रहना चाहते हैं. लेकिन कैथोलिक ईसाइयों ने इस जनमत संग्रह का बहिष्कार किया था.

इसके बाद जुलाई 1973 में उत्तरी आयरलैंड के लिए एक नई एसेंबली का गठन किया गया था. और फिर दिसंबर में आयरलैंड परिषद का गठन किया गया था ताकि उत्तरी आयरलैंड और आयरलैंड गणराज्य के बीच सीमा पार व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके.

लेकिन ब्रिटेन के साथ रहने की वकालत करने वाले दलों ने इसका विरोध किया जिसके कारण ये परिषद भंग कर दी गई.

उसके बाद ब्रिटेन उत्तरी आयरलैंड पर सीधे शासन करने लगा जो कि अगले 26 साल तक जारी रहा.

संबंधित समाचार