इतिहास के पन्नों में 10 मार्च

आज के दिन यानी दस मार्च को इतिहास में कुछ अहम घटनाएं हुई थीं जिनमें मार्टिन लूथर किंग के हत्यारे को सज़ा के अलावा बरमूदा के ब्रितानी गवर्नर और उनके सहयोगी की हत्या शामिल हैं.

1969: मार्टिन लूथर किंग के हत्यारे को उम्र कैद

Image caption नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले मार्टिन लूथर किंग की हत्या को साजिश माना गया था.

मेम्फिस की एक अदालत ने नागरिक अधिकारों के लिए लड़नेवाले नेता मार्टिन लूथर किंग के हत्यारे जेम्स अर्ल रे को 99 साल की कैद की सजा सुनाई थी.

जेम्स अर्ल रे ने मार्टिन लूथर की हत्या की बात कबूल की थी.

उन्होंने जुर्म का इकरार इस शर्त पर किया था कि उन्हें मौत की सजा नहीं दी जाएगी. उनके इकबाले जुर्म से मुकदमे के जल्द खत्म होने में भी मदद मिली.

रे को लंबे समय तक कैद में रहना पड़ा क्योंकि जब उन्हें पैरोल मिल सकती थी तब उनकी उम्र कम से कम 90 साल की रही होगी.

हालांकि उन्हें सजा दिए जाने के बाद भी इस चर्चा पर विराम नहीं लगा कि मार्टिन लूथर की हत्या एक साज़िश का नतीजा थी.

अहिंसा की बात करने वाले मार्टिन लूथर किंग की हत्या अप्रैल 1968 में एक बंदूकधारी ने कर दी थी. उस समय वो एक होटल की बालकनी पर खड़े थे.

वो मेम्फिस में सामाजिक न्याय की मांग को लेकर आयोजित हुई एक रैली को संबोधित करने के लिए गए थे.

हत्या के फौरन बाद मामले की जांच एफबीआई को सौंप दी गई थी.

1973: बरमूदा में ब्रितानी अधिकारियों का कत्ल

Image caption छह महीनों के भीतर बरमुदा में ब्रितानियों की हत्या का ये तीसरा मामला था.

एटलांटिक महासागर के इलाके में स्थित बरमूदा में आज के दिन ही ब्रितानी गवर्नर और उनके सहयोगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

समझा जाता है कि वहां सरकार के स्वरूप को लेकर समाज के एक तबके में रोष था. कुछ लोगों को लगता था कि वहां की सरकार में गोरों को बहुत अधिकार प्राप्त थे.

ब्रितानी गवर्नर सर रिचर्डस शार्पल्स और उनके सहयोगी कप्तान ह्युज सेअर्स का कत्ल तब कर दिया गया जब वो अपने निवास स्थान के लॉन में टहल रहे थे.

गवर्नर के बंगले में बहुत कम सुरक्षा थी.

हत्या करने के बाद कातिल वहां से भागने में कामयाब हो गया.

इसके छह महीने पहले बरमूदा में ब्रितानी पुलिस प्रमुख की भी हत्या कर दी गई थी.

बरमूदा की 54,0000 जनसंख्या के तकरीबन 60 प्रतिशत लोग काले थे.

हालांकि देश के नेता बहुसंख्यकों में से ही थे लेकिन लोगों को लगता था कि वो ब्रितानियों के समर्थक हैं.

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