सुनामी और तबाही के एक साल

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Image caption हादसे की बरसी पर रविवार को जापान में प्रार्थना सभाएं की जाएंगी

जापान में पिछले साल आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी की आज पहली बरसी है. देश के उत्तर-पूर्वी इलाके में आई इस आपदा में हजारों लोग मारे गए थे.

जापान में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 9 मापी गई थी. ये रिकार्ड शुरू होने के बाद अब तक का सबसे ज्यादा तीव्रता का भूकंप था.

इसी भूकंप में जापान के फूकुशिमा डाइची परमाणु केन्द्र को गंभीर नुकसान पहुंचा. प्लांट से परमाणु विकिरण लीक होने की सूचना के बाद इलाके में रह रहे हजारों लोगों को स्थानांतरित कर दिया गया था.

इस दिन को याद करने के लिए रविवार को जापान में सभाएं रखी गई है, साथ ही पिछले साल भूकंप जिस समय आया था ठीक उस समय एक मिनट का मौन भी रखा जाएगा.

मुख्य राजकीय सभा टोक्यो के राष्ट्रीय थिएटर में आयोजित की जा रही है, जिसमें जापान के सम्राट अकिहितो और प्रधान मंत्री योशिहिको नोडा शामिल होंगे.

जापान के 78 वर्षीय सम्राट अकिहितो का हाल ही में दिल का ऑपरेशन हुआ है. खबरों के मुताबिक वो इस सभा में अपनी पत्नि मिशिको के साथ 20 मिनट तक रहेंगे.

रविवार को जापान के उत्तर-पूर्वी इलाके में चेतावनी के सायरन बजाए जाएंगे और साथ ही देश भर में प्रार्थना सभाएं की जाएंगी.

जापान की क्योडो समाचार एजेंसी के अनुसार राजधानी टोक्यो में और आस पास के इलाकों में कुछ देर के लिए ट्रेनें भी बंद रखी जाएगी.

परमाणु विकिरण का डर

टोक्यो के उत्तर-पूर्व के 400 किलोमीटर में फैले इलाके में स्थानीय समय दोपहर के दो बजकर 46 मिनट पर 11 मार्च, 2011 को भूकंप आया जिससे देश को जान- और माल का भारी नुकसान उठाना पड़ा.

भूकंप के थोड़ी ही देर बाद आई सुनामी से उत्तर पूर्व के तटीय इलाके पूरी तरह से तहस नहस हो गए. समुद्री पानी के तेज बहाव के आगे पुल, सड़कें, इमारतें, गाड़ियां जो भी आई वो बह गई.

जापान पर पड़ी इस दोहरी मार में 15,700 से ज्यादा जाने चली गई और करीब 4500 लोगों के बारे में अब तक पता नहीं चल पाया.

फूकुशिमा परमाणु केन्द्र पर इस आपदा का काफी गंभीर असर पड़ा.

भूकंप के बाद आग और धमाकों में परमाणु केन्द्र के छह रिएक्टरों में से चार की इमारते क्षतिग्रस्त हो गई और उनमें से विकिरण फैल गया.

विकिरण फैलने के बाद प्लांट से 20 किलोमीटर तक की दूरी का इलाका खाली करा लिया गया जिससे हजारो लोग बेघर हो गए.

हादसे के बाद फूकुशिमा परमाणु केन्द्र को बंद रखा गया है और जापान के प्रधान मंत्री ने कहा है कि आने वाले सालों में इसे पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा. उन्होंने तटीय इलाकों के शहरों का भी पुनर्निर्माण करने का आश्वासन दिया है.

धीमा सुधार ?

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Image caption जापान की सड़कों पर लोग परमाणु केन्द्रों के विरोध में रैलियां निकालेंगे.

इन सब के बावजूद संवाददाता कहते है कि जापान आर्थिक और राजनीतिक तौर पर अब तक इस आपदा से उबर नहीं पाया है.

जापान के तत्कालीन प्रधान मंत्री नाओतो कान ने हादसे के कुछ महीनों के भीतर ही अपना इस्तीफा दे दिया.

आपदा के दौरान और उसके बाद कुशल नेतृत्व की कमी का हवाला देकर उनकी खूब आलोचना हुई.

हादसे के बाद मलबा हटाए जाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उत्तर-पूर्वी इलाके के लोगों की शिकायत है कि सुधार की प्रक्रिया काफी धीमी है.

राजधानी टोक्यो, फूकुशिमा और जापान के अन्य भागों में इस बरसी पर परमाणु विरोधी प्रदर्शन भी आयोजित किए गए है.

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