मलेशिया का 'चारा घोटाला', मंत्री का इस्तीफा

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Image caption शाहरीज़ात अब्दुल जलील के परिवार पर सरकारी धन के ग़लत इस्तेमाल का आरोप है.

मलेशिया में पशु परियोजना से जुड़े एक घोटाले में फंसी एक महिला मंत्री ने कहा है कि वो अपने पद से इस्तीफा देंगी.

महिला, परिवार और समुदाय मंत्री, शाहरीज़त अब्दुल जलील ने रविवार को कहा कि वो आठ अप्रैल को पद छोड़ेंगी.

अब्दुल जलील के परिवार पर आरोप है कि उन्होंने परियोजना के लिए 8 करोड़ 30 लाख डॉलर के सरकारी कोष का इस्तेमाल लग्ज़री फ़्लैटों, छुट्टियों और एक मर्सिडीज़ गाड़ी खरीदने के लिए किया.

'काओगेट'

मलेशिया के इस चारा घोटाले या पशु घोटाले के कारण चर्चा है कि प्रधानमंत्री नजीब रज़क आने वाले चुनाव टाल दें.

ये पशु परियोजना शाहरीज़त अब्दुल जलील के पति और तीन बच्चों द्वारा चलाया जा रहा है. लेकिन मंत्री का कहना था कि उनके इस्तीफ़े का इस परियोजना से लेना-देना नहीं था.

अब्दुल जलील ने कहा कि बतौर संसद सदस्य अगले महीने ख़त्म हो रहे अपने कार्यकाल के बाद वे 'सरकार की एक ज़िम्मेदार सदस्य' के रूप में इस्तीफा दे देंगी.

उनका ये भी कहना था कि इस्तीफ़े के बाद भी वे सत्तारूढ़ पार्टी, युनाइटिड मालेय नेशनल ऑरगनाइज़ेशन, और साझा सरकार की महिला शाखा की अध्यक्ष पद पर बनी रहेंगी.

महिला मंत्री ने फ़ैसला महीनों तक जनता और विपक्ष के दबाव के बाद लिया. हालांकि घोटाला सार्वजनिक होने से पहले माना जा रहा था कि अब्दुल जलील की सदस्यता की अवधि बढ़ाई जा सकती है.

बलिदान

महा लेखापरीक्षक की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्री के परिवार द्वारा चलाया जा रहे नेशनल फ़ीडलॉट सेंटर ने वर्ष 2010 के लिए गोमांस उत्पादन में 40 प्रतिशत आत्मनिर्भरता का लक्ष्य पूरा नहीं किया.

इसके बाद ऐसे आरोप सामने आए कि कंपनी, सरकारी कर्ज़े का मलेशिया और सिंगापुर में लग्ज़री अपार्टमेंट सहित व्यक्तिगत कामों के लिए इस्तेमाल कर रही थी.

हालांकि मंत्री ने इन आरोपों से इंकार किया है लेकिन पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है.

देश से भ्रष्टाचार मिटाने की बात करने वाले प्रधानमंत्री नजीब रज़क के लिए ये घोटाला शर्म का सबब बन गया है.

मलेशिया में 2013 में चुनाव होने है लेकिन माना जा रहा है कि इस घोटाले के बाद प्रधानमंत्री इसी साल चुनावों की घोषणा कर सकते हैं.

प्रधानमंत्री ने शाहरीज़त अब्दुल जलील के इस्तीफ़े को 'बलिदान' बताया है.

सरकारी समाचार एजेंसी बरनामा के मुताबिक, नजीब रज़क का कहना था, "हालांकि अब तक ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला है कि मंत्री ने कानूनन कोई ग़लत काम किया है लेकिन इस परियोजना के विवादों में घिरने की वजह से उन्होंने ख़ुद ही पद छोड़ने का फ़ैसला किया."

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